1. ईको पार्क गरियाबंद– जिसमें करोड़ों रुपयों लगे आज तक उसका उपयोग नहीं हुए। जनता पूछती है की उनकी टेक्स राशी के पैसे को क्या किए। कब खुलेगा ईको पार्क इंतजार में है
यही सिस्टम बन गया कब दद मरे कब बरा भात खाबो

SDO मनोज चंद्राकर फारेस्ट विभाग के खुद खाई मलाई गड्ढे में सड़क की तोफ़ा केशोडार जनता की परेशानी बढ़ी।
2. इंडोर स्टेडियम– गरियाबंद जिसमें लाइट लगे हुए हैं परंतु ट्रांसफार्मर लाइट कलेक्शन नहीं, करोड़ों रुपए की राशि का बंदरबाट होने के बावजूद भी आज तक इनडोर स्टेडियम की स्थिति बदहल है।
3. केशोडार रोड – कार्य किया गया लेकिन आज उस रोड पर नाव की तरह चलने पर मजबूर गाड़ी जीता जागता गड्ढे में सड़क की तस्वीर


4. केशोडार पुल – जो नागिन की तरह लहराती हुई पुल 20 लाख की जो एक बार बनाए थे एक बारिश आने पर बह कर भ्रष्टाचार की पोल खोल दी थी फिर दूसरी बार बनाई गई परंतु लहरी हुई पुल जिता जागता उदाहरण है।
इतना ही नहीं केशोडार रोड में एक गाड़ी को पासिंग के लिए बहुत संघर्ष करना पड़ता है कभी-कभी गाड़ियों आगे पीछे करके जाना पड़ता है। रोड की चौड़ाई की कमी है गाड़ी आर पार जाने की जगह नहीं है और भी कारनामों की गिनती इतनी बड़ी है कि एक बार में बता नहीं सकते।
इतना अच्छा कार्य करने वाले SDO मनोज चंद्राकर के स्थानांतरण 31/07/2025 को देवभोग हो गया है

परंतु साहब को अभी भी गरियाबंद घर की मोहमाया छोड़ नहीं पा रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री के परिवार वाले को मिली झटका स्थानांतरण चाही थी महासमुंद या रायपुर लेकिन साहब को मिली देवभोग सोचा था कुछ हुआ कुछ, साहब सरकारी मकान को छोड़ने को तैयार नहीं वर्तमान वर्तमान SDO रेस्टहाउस में रहने पर मजबूर , अभी देवभोग फारेस्ट विभाग के SDO मनोज चंद्राकर 2022/23 के खुद खाई मलाई केशोडार सड़क पर लाई छाज, विकास पर रोक, गड्ढे में सड़क जिम्मेदार कौन
सड़क में गड्ढे तो आप बहुत देखे होगे लेकिन गड्ढे में सड़क पहली बार देखे सवाल उठता है कि जिला गरियाबंद मुख्यालय से लगा हुआ स्पेशल रोड फारेस्ट विभाग की सड़क ग्राम केशोडार में पड़ता है। फारेस्ट विभाग विकास नहीं देख सकती। प्रत्येक वर्ष पहले चना मुर्रा मुरूम का वर्ष के पहले छिड़काव किया जाता था। अब बंद हो गया। पुल, 5 लाख का बना होगा । निकल गया 20 लाख, लाखों रुपए निगल गए फारेस्ट विभाग के SDO मनोज चंद्राकर पूर्व मुख्यमंत्री के रिश्तेदार होने का धौंस जमाने में कोई कसर नहीं छोड़ी काग्रेस की सरकार में 2022/23 में बनी WBRM रोड़ बनाई गई। लेकिन गिट्टी के नाम पर केवल गिन गिन कर एक एक गिट्टी ही डाली गई प्रकाशन होने पर कहा गया की और गिट्टी डाली जाएगी। पत्रकार जानकारी मांगने पर SDO द्वारा शिकायत करने पहुंचे उनके चपरासी थाने में यही हरकते करने वाले SDO ने गरियाबंद जिले में मलाई खुद खाई छाज जनता की झोली में पड़ी । NH 130 मुख्यालय से लगा फारेस्ट रोड़ होने के चलते आम जनता को उसकी भरपाई चुकानी पड़ रही है।
डब्लू बी आर एम रोड बनाए हैं परंतु 1 वर्ष में ही गड्ढे में सड़क बन चुके है। गड्ढे में सड़क होने का कारण फारेस्ट विभाग लापरवाही करतूत साफ स्पष्ट है खामियाजा ग्राम बासी , शराब भट्टी के भक्तों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इतना ही नहीं शराब भट्टी होने से सरकार को राजस्व विभाग मिल रहा है। गड्ढे में सड़क होने से कई बार एक्सीडेट हुए हैं जिम्मेदार फारेस्ट विभाग विकास से कोसों दूर विभाग के SDO अधिकारियों कर्मचारियों फल फूल रहे थे जनता को कोई नहीं देखता बरसात के पहले मुरूम डाला जाना था परंतु नहीं डाले फारेस्ट विभाग की गोला लकड़ी गाड़ी चलने से सड़क में गड्ढे तब्दील हो चुका है भगवान भरोसे गड्ढे में सड़क ग्राम केशोडार की जिला गरियाबंद की दुर्भाग्य है। की फारेस्ट विभाग की सड़क है। औषधि के नाम से केशोडार में लाखों रुपए कमा रहे हैं। परंतु आम जनता रोड विकास के लिए तरस रही हैं।
कहावत इस प्रकार से की छलनी ने कहा सुई से की सुई तुम्हारे मे छेद है। परंतु छलनी को नहीं मालूम की कितने छेद उस में है
SDO की लीपपोती पर सवाल जनता की पूर्व में जांच पर बाधा डाला जाता था क्योंकि पूर्व मुख्यमंत्री के रिश्तेदार कह कर किए कार्य की जानकारी नहीं दी जाती है। फॉरेस्ट विभाग में किया गया कार्य में बड़ी गड़बड़ी है। उच्च स्तर पर जांच टीम गठित होकर जांच होनी चाहिए। PWD इंजियर से मूल्यांकन, भौतिकी सत्यापन होनी चाहिए ।


















