दोहरा खेल बेनकाब: शिकायत भी खुद, अवैध रेत खनन भी खुद—हाथखोज से रायपुर तक काला कारोबार

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“गांव हमारा, नदी हमारी”—कलेक्टर आदेश को चुनौती देकर हाथखोज में सरपंच ने शुरू कराया अवैध रेत कारोबार जिला गरियाबंद ब्लॉक फिंगश्वर ग्राम पंचायत हाथखोज में अवैध रेत उत्खनन का मामला अब खुलेआम प्रशासन को चुनौती देने तक पहुंच चुका है। आरोप है कि सरपंच द्वारा गांव में बैठक लेकर न सिर्फ अवैध खनन को मंजूरी दी गई, बल्कि कलेक्टर के आदेशों को भी सिरे से नकार दिया गया।ग्रामीणों के अनुसार, हाल ही में आयोजित बैठक में सरपंच द्वारा कथित रूप से कहा गया—“गांव हमारा है, नदी हमारी है, हमें किसी से डर नहीं है, कलेक्टर का आदेश हो या कोई और नियम, हमें नहीं मानना है।”

इस बयान के बाद बैठक में मौजूद कुछ लोगों की सहमति से अवैध रेत उत्खनन को जारी रखने का निर्णय लिया गया।यह मामला यहीं नहीं रुकता। सामने आए दस्तावेज बताते हैं कि उसी पंचायत के सरपंच-सचिव द्वारा प्रशासन को आवेदन देकर अवैध उत्खनन की शिकायत भी की गई है। यानी एक तरफ खुद ही अवैध रेत खनन को संचालित किया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ कागजों में खुद को शिकायतकर्ता दिखाकर बचने की तैयारी भी की जा रही है। यह दोहरा खेल अब उजागर हो चुका है।जानकारी के अनुसार, हाथखोज क्षेत्र से रेत निकालकर कुम्हारी टीला मार्ग के जरिए हाइवा से लगातार रायपुर की ओर भेजी जा रही है। यह पूरा काम दिन-रात बेखौफ तरीके से किया जा रहा है। पंचायत क्षेत्र में बिना सरपंच की अनुमति के एक ट्रॉली मिट्टी तक नहीं निकल सकती, ऐसे में इतने बड़े स्तर पर रेत परिवहन सीधे-सीधे मिलीभगत की ओर इशारा करता है।बैठक में यह भी कथित रूप से चेतावनी दी गई कि यदि कोई ग्रामीण इसका विरोध करेगा, तो उसके खिलाफ गांव स्तर पर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। यह न सिर्फ कानून का उल्लंघन है, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था और ग्राम सभा की मूल भावना का भी अपमान है।इस पूरे मामले में National Green Tribunal (NGT) के नियमों, पर्यावरण संरक्षण कानूनों और कलेक्टर द्वारा जारी स्पष्ट आदेशों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। नियमों को जानबूझकर तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत किया जा रहा है ताकि अवैध गतिविधियों को वैध दिखाया जा सके।अब स्थानीय स्तर पर मांग उठ रही है कि सरपंच और सचिव के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए,

अवैध उत्खनन की मात्रा के अनुसार घन मीटर के आधार पर भारी वसूली की जाए, और संबंधित धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज कर गिरफ्तारी तक की कार्रवाई हो।यदि इस मामले में तत्काल कार्रवाई नहीं होती, तो यह प्रशासन की साख पर बड़ा सवाल खड़ा करेगा और यह संदेश जाएगा कि कानून से ऊपर पंचायत स्तर पर मनमानी चल रही है। प्रशासनिक आदेश केवल कागजों तक सीमित हैं और जमीनी स्तर पर नियमों को खुलेआम तोड़ा जा सकता है। देखना यह है कि प्रशासन अब इस पर क्या कार्यवाही करती है या खुली छूट देकर ग्राम पंचायत हाथखोज को संरक्षण देती है