लचकेरा समिति में धान खरीदी घोटालाजानकारी मांगना बना अपराध, प्रबंधक का तानाशाही रवैया, राजनीतिक संरक्षण में फल-फूल रहा भ्रष्टाचार

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लचकेरा समिति में धान खरीदी घोटाला
जानकारी मांगना बना अपराध, प्रबंधक का तानाशाही रवैया, राजनीतिक संरक्षण में फल-फूल रहा भ्रष्टाचार

गरियाबंद | 29 जनवरी 2026
जिला गरियाबंद अंतर्गत कृषक सेवा सहकारी मर्यादित समिति, लचकेरा में धान खरीदी को लेकर गंभीर अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए हैं। समिति की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना कोई नई बात नहीं है, लेकिन इस बार मामला केवल अनियमितता तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सूचना मांगने पर खुलेआम धमकी, अपमान और जानकारी देने से इनकार तक पहुंच गया है।


सूचना मांगने पर भक्ति का उपदेश!
दिनांक 29/01/2026 को समिति से आज की धान खरीदी सूची एवं यह जानकारी मांगी गई कि आज दिन कितने किसान पंजीकृत थे। इस वैधानिक और सामान्य जानकारी के जवाब में समिति प्रबंधक भूपेंद्र कुमार साहू ने जो रवैया अपनाया, वह न केवल नियमों के विरुद्ध है बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सीधा प्रहार भी है।


प्रबंधक द्वारा कहा गया “क्या लेकर आए हो, क्या लेकर जाओगे? भगवान की भक्ति करो, जानकारी लेकर क्या करोगे? जीवन 24 घंटे का है, भक्ति में जीवन समर्पित करो।”
सूचना मांगने वाले को इस तरह दार्शनिक प्रवचन देना, साफ दर्शाता है कि समिति प्रबंधन स्वयं को कानून और नियमों से ऊपर समझ रहा है।
ऑनलाइन बताकर पल्ला झाड़ा, फिर खुली धमकी
जब पुनः वैधानिक तरीके से जानकारी मांगी गई, तो प्रबंधक ने कहा कि “जानकारी ऑनलाइन है, वहीं से निकाल लो”। जबकि समिति का यह दायित्व है कि वह सार्वजनिक जानकारी उपलब्ध कराए।
इसी दौरान सूचना तंत्र से प्राप्त जानकारी में चौंकाने वाला तथ्य सामने आया
किसान पंजीयन लचकेरा क्षेत्र का
लेकिन रायपुर से लगभग 40 कट्टा धान लाकर खपाया गया
जब इस विसंगति पर प्रबंधक से सवाल किया गया, तो वे बौखलाहट और तिलमिलाहट में आ गए और साफ शब्दों में कहा”हम यहां इस तरह से काम नहीं करते, न हम जानकारी देंगे, न कुछ बताएंगे। जो करना है कर लो।”
यह कथन सीधे तौर पर कानून को चुनौती देने जैसा है।
राजनीतिक संरक्षण में फलता-फूलता भ्रष्टाचार
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, समिति प्रबंधन को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है। इसी संरक्षण के चलते न तो अधिकारी कार्रवाई कर पा रहे हैं और न ही शिकायतों पर कोई ठोस कदम उठाया जायेगा ।
स्थिति इतनी गंभीर है कि
मिलर, समिति प्रबंधन और पदाधिकारी मिलकर
व्यापारियों का धान किसानों के नाम पर खपाया जा रहा है
जब इस पूरे नेटवर्क की जानकारी मांगी गई, तब भी कोई दस्तावेज, सूची या जवाब उपलब्ध नहीं कराया गया।
नोडल अधिकारी की भूमिका भी संदेह के घेरे में
गरियाबंद जिले में नियुक्त नोडल किया गया समिति अधिकारियों की कार्यशैली भी सवालों के घेरे में है। आरोप है कि
मौके पर निरीक्षण नहीं किया जाता
घर बैठे फोटो अपलोड कर सत्यापन किया जा रहा है निरीक्षण टीम द्वारा 40 कट्टा का फोटो जो भौतिकी सत्यापन घर में करना था नहीं किया गया किसान कि जानकारी मांगी गई तो प्रबंधक द्वारा नाम एवं पंजीयन लिस्ट तक नहीं दी कहा की ऑनलाइन है निकल लो प्रबंधक द्वारा इस प्रकार रवैया से साफ साफ यह सिद्ध होता है कि व्यापारी किसान के नाम पर दोनों की साठ गांठ कई वर्षों से चल रहा है। क्योंकि सूचना तंत्र से जानकारी प्राप्त हुई है खरीदी प्रभारी की भूमिका धान को हुंडी लगाने की दिखावा लगी हुई थी। तुरंत रायपुर से आ रहा हूं व्यक्ति द्वारा कहा गया ।
कागजों में सब कुछ सही दिखाया जा रहा है
ऐसी लापरवाही और मिलीभगत के चलते भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाना लगभग नामुमकिन होता जा रहा है।
पुराना इतिहास, नई कहानी नहीं
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह भ्रष्टाचार आज का नहीं है। समिति प्रबंधक पूर्व में भी हटाया जा चुका है, इसके बावजूद वर्षों से वही खेल जारी है। ऐसा प्रतीत होता है कि यह भ्रष्टाचार पीढ़ी दर पीढ़ी हस्तांतरित होता जा रहा है।
सबसे बड़ा सवाल
जब सहकारी समितियां
किसानों की सेवा के लिए बनी हैं सार्वजनिक पारदर्शिता के साथ धान की जानकारी होनी चाहिए। राजनीतिक प्रभाव अत्यधिक हावी है। सरकारी पारदर्शिता पर बड़ा सवाल
तो फिर जानकारी देने से डर क्यों?
और यदि सब कुछ नियम के अनुसार है, तो सूचियां सार्वजनिक क्यों नहीं की गई व्यापारी का 40 कट्टा धान की जानकारी ना सामने आ जाए।
यह मामला केवल लचकेरा समिति का नहीं, बल्कि फिंगेस्वर की धान खरीदी व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस पर आंख मूंदे रहता है या सच में भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने की हिम्मत दिखाता है।
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