सेमरढाप छत्तीसगढ़ भागवत कथा अन्तर्गत श्री कृष्ण रूक्मणी विवाह पर भव्य बारात निकाली गई

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गरियाबंद – खुर्सीपार समीपस्थ ग्राम सेमरढाप में जारी भागवत सप्ताह अमर कथा के छठे दिवस कृष्ण रूक्मणी विवाह प्रसंग पर बोलते हुए अंबाला से पधारे कथा व्यास आचार्य सनातन चैतन्य जी महाराज ने कहा कि देवी रूक्मिणी लक्ष्मी स्वरूपा हैं सतयुग में लक्ष्मी समुद्र से उत्पन्न हुई त्रेतायुग में लक्ष्मी जनक के यहां सीता के रूप में उत्पन्न हुईं और द्वापर युग में लक्ष्मी

कुंडीलपुर में राजा भीष्मक यहां रूक्मणी के रूप प्रगट हुई! भगवान श्री कृष्ण की सोलह हजार एक सौ आठ रानियां थी! आचार्य जी ने कहा कि द्वारका हमारा शरीर है जिसमें नव दरवाजे हैं द्वारका के मालिक भगवान श्री कृष्ण हैं तो हमारे शारीर में आत्मा मालिक है हमारे शरीर में सोलह हजार एक सौआठ नस नाड़ी हैं इसमें तीन नाड़ी प्रमुख है इंगला पिंगला और सुषुम्ना नाड़ी प्रमुख है इसमें भी सुषुम्ना नाड़ी श्रेष्ठ है!


आज कथा प्रसंग अनुसार भगवान श्री कृष्ण व रूक्मणी विवाह पर सुंदर झांकी निकाली गई श्री कृष्ण की भव्य बारात निकली गाजे बाजे फाटकों व जय जय कारों से पूरा आसमान गूंज रहा था!


कथा स्थल पर मंत्रोचारण के साथ श्री कृष्ण रूक्मिणी विवाह सम्पन्न हुआ!


आचार्य सनातन चैतन्य जी महाराज बहुत ही सरल भाषा शैली में सरस भागवत कथा कह रहे हैं उनकी कथा शैली की खूब प्रशंसा हो रही हैं! कथा आयोजक प्यारी लाल साहू व मास्टर सदानंद ध्रुव ने बताया कि उक्त कथा दो सत्र में चल रही हैं सुबह 10 से 1.30 बजे तक व अपरान्ह 2.30 बजे से 5.30 बजे तक चल रही हैं!
उक्त कथा 13 तारीख तक चलेगी! कथा श्रवण करने के लिए आस पास गांवों से व दूरदराज स्थानों से भी बड़ी संख्या में भक्त लोग पहुंच रहे हैं! हजारों लोग रोज भंडारा में दोपहर व रात्रि में भोजन प्रसाद ग्रहण कर रहे हैं!
मास्टर सदानंद ध्रुव