श्रमिक योजनाओं की बंदरबाट श्रम विभाग दलाल के माध्यम से ले रहे कमीशन

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जिला गरियाबंद 2012 मैं अस्तित्व के आने के बाद श्रम पदाधिकारी राजपूत थे DN पात्र अभी मिंज परन्तु सिस्टम आज तक नही बदला सबसे ज्यादा किसी प्रकार से घोटाला कमीशन खोरी DN पात्र से शुरुआत हुआ। DN पात्र तो ऑफिस में इतनी मनमानी की कोई भी पत्रकार उनके कमीशन खोरी को प्रकाशन करता तो उनको झूठा आरोप लगाया जाता था। इतना ही नहीं श्रम इंस्पेक्टर थी इन दोनों कई योजना को कमीशन मिलने से वह किसी भी व्यक्ति को दे देते है । फिंगेश्वर में मजदूर नहीं होने के बाद भी उनकी कार्ड बन जाती थी। नियोजन कोई भी बन जाता है। सबसे ज्यादा विशेष लाभ फिंगेश्वर में मिला है क्योंकि यह ब्लॉक धनाड है। *घोटाला का प्रकरण की किस प्रकार से करते हैं* 1, आपने एजेंट रखते हैं मजदूर ठेकेदार, 2, चॉइस सेंटर, 3, छुटपुटिया नेता, 4, बेरोजगार व्यक्ति। 1. चॉइस सेंटर ऑनलाइन करते है उसके पश्चात विभाग में जांच कर उसकी योजना देनी पड़ती है कार्ड बनानी पड़ती है। हार्ड दस्तावेज जमा कर उस दस्तावेज आगे बढ़ाया जाता है परंतु विभाग इतनी दिमागदार वह अपने व्यक्तियों को लगा दिया देते हैं । जो हितग्राही उनके मांगे अनुसार राशि जमा कर देते हैं । तो उन्हें उसे योजना का लाभ दे दिया जाता है। अब यह देखिए विभाग किस प्रकार से खेल खेलती है कहा जाता है विभाग की कोई गलती नहीं है लेकिन सबसे बड़ा खेल श्रम इंस्पेक्टर की आईडी में खेल है इसके बाद अधिकारी बाबू तीनों के मिलीभगत से खेल को अंजाम दिया जाता है। ऑनलाइन क्रमांक अनुसार होने के बाद भी वह किस प्रकार से झोलझाल करते हैं । क्रमांक अनुसार फाइल चलनी चाहिए। कोई एक हितग्राहियों का दस्तावेज में कमियां होगी तो नहीं होती है लेकिन यहां पर प्रत्येक फाइलों में गड़बड़ियां हैं सूत्रों के मुताबिक जानकारी प्राप्त है। क्रमांक अनुसार हितग्राहियों को योजना का लाभ दिया जाना चाहिए। ऐसा इसलिए नहीं होता है। दस्तावेज की कमी है। कहा देते हैं लेकिन मोबाइल नंबर तो रहता है इनके पास फोन करके हितग्राहियों को बता दें सकते हैं क्यों करेंगे ? 2. केवल कमिशन से है ? उनको लाभ देते हैं दलाल का नाम भी बताया जाएगा। नोनी योजना के अंतर्गत कई बार धरोहर संदेश समाचार पत्र एवं यूट्यूब चैनल में प्रमुखता से चलाया गया था तब प्रकाशन के बाद योजना का लाभ दिया गया था। अभी सुशासन योजना के अंतर्गत भी सच्चाई बताई गई परंतु देखिए कि किस प्रकार से खेल श्रम विभाग अधिकारी श्रम इंस्पेक्टर बाबू सभी की मिलीभगत से आज तक सिस्टम की सुधार नहीं हुई है। सुशासन समाधान केवल दिखावा हो गया है। श्रम विभाग राजपूत के समय में कई ऐसे कमीशनखोर दलाल कर को रखे हुए थे कि गांव-गांव में 300 रुपए लेकर श्रम कार्ड बनाने के बाद लिया जाता था। समाचार को प्रमुखता से धरोहर संदेश में प्रकाशन किया गया । दलालों के चेहरा बदल गए परंतु श्रम विभाग में दलालों की कमी नहीं आई। सबसे ज्यादा छुरा, फिंगेश्वर, गरियाबंद में सबसे ज्यादा कार्ड बने हैं । फिंगेश्वर प्रथम स्थान में योजनाओं के लाभ ले रहे हैं । छुरा गरियाबंद फिंगेश्वर में दलाल सक्रिय है वही मैनपुर देवभोग मैं श्रम कार्ड की कमी है एवं योजनाओं का लाभ नहीं ले रहे हैं। क्योंकि यहां पर दलालों की कमी है जिसके कारण विभाग और दलाल का तालमेल न होने से यहां पर योजनाओं का लाभ नहीं ले पा रहे हैं। *उसके बाद श्रम विभाग की मनमानी का अर्थ है* कि श्रम विभाग के अधिकारी नियमों और प्रक्रियाओं का पालन किए बिना अपने मन से काम करते हैं, जिससे श्रमिकों को नुकसान होता है. श्रम विभाग की मनमानी के कुछ उदाहरण:समाचार पत्र में अपनी योजनाओं को नहीं प्रकाशन करना । दलाल सक्रिय है पत्रकार जानकारी मांगने में बाइट नहीं देना है। *कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार:श्रम विभाग दे रही बढ़ावा* बताया जाता है कि गांव गांव में दलाल सक्रिय है घूम घूम कर हितग्राहियों से रकम वसूली कर रही है परंतु FIR विभाग नहीं करती सरकार की योजना को बदनाम कर रही है विभाग आपने दलाल बैठा कर मोटी रकम वसूली रही है। जो हितग्राहिय राशी देने में सक्षम हैं उनको लाभ मिलता है जो नहीं देते है उनको लाभ नहीं मिलता है राशी नगद देनी पड़ती हैं यही वजह है। ऑनलाइन आवेदन करने के बाद दलालो को उगाही का अड्डा बना दिया गया है विभाग सुशासन समाधान केवल दिखावा श्रमिक श्रम विभाग के अधिकारियों से डरते हैं और अपनी शिकायतें दर्ज नहीं करते हैं. इसके कारण विभाग दलाल फलफूल रहे हैं। श्रम विभाग की मनमानी का समाधान:शिकायतें दर्ज करना:श्रमिकों को श्रम विभाग की मनमानी के खिलाफ शिकायतें दर्ज करनी चाहिए.कानूनी कार्रवाई:यदि शिकायतें दर्ज करने से समाधान नहीं होता है, तो श्रमिकों को कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए.मीडिया से संपर्क करना:श्रमिकों को मीडिया से संपर्क करना चाहिए और श्रम विभाग की मनमानी के बारे में जानकारी देनी चाहिए.जनजागरूकता:मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की योजना है कि हमारी सरकार की महत्वपूर्ण योजना है कि अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे इस योजना में किसी को कोई कमीशन नहीं देनी है आप ऑनलाइन आवेदन करने के बाद आप 15 दिन में आकर ऑफिस में संपर्क कीजिए किसी दलाल के चक्कर में नहीं आना है आप ऑनलाइन आवेदन करने के बाद आपके पास कोई भी व्यक्ति आकर आपसे राशी मांगती या मांगता हैं तो आप सबसे पहले इस नंबर में फोन करके बताइए 7000326919 मीडिया से संपर्क कीजिए,,,,