गरियाबंद जिला बनने के बाद भी आज तक श्रम विभाग के अधिकारी कर्मचारियो की करतूत में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है । चाहे राज्य या केन्द्र सरकार ऑनलाइन सुविधा कर दी है परन्तु श्रम विभाग बैठे अधिकारी कर्मचारी द्वारा भ्रष्टाचार में लिप्त वही आनलाइन आवेदन के तहत योजनाओं की लाभ नहीं मिल रही है। मिली सूत्रों के मुताबिक जानकारी अनुसार गरियाबंद के पास में दो बहने नोनी सहायता योजनाओं के तहत में श्रम विभाग के दादल साहू द्वारा हितग्राही के घर जा कर राशी लिया गया है।

दलाल की हिम्मत देखे बहुत बड़ी क्राइम हितग्राहियों के बैंक खाता यनि पासबुक आपने पास रखते हैं। जो कैश नहीं दे सकते हैं। इतना बड़ा बड़ा काम करते हैं। क्योंकि हितग्राही कभी मुकर नहीं सकते दलाल बैंक पासबुक अपने कब्जे में रखते हैं। जिसमें कमीशन लेने में आसानी हो।
कभी दलाल BJP नेता का चोला पहन लेता है। कभी पत्रकार का चोला पहन कर कर रहे। मजदूर नेता बन जाता हैं। श्रम विभाग की उगाई दलाल बेखौब हो कर विभाग की योजनाओं से हितग्राहियों के घर जा कर लुट मचाई हुई है। विभाग की मिलीभगत से अधिकारी कर्मचारी दलाल बेखौब फलफूल रहे हैं। सरकार की योजनाओं को गरीब जनता तक पहुंचे। सरकार की मानसा पर डकैती कर रहे हैं। विभाग के अधिकारी कर्मचारी दलाल लिप्त तो गरीबों को कहा मिलेगी योजना का लाभ। चोर डाकू जब फन फैलाए नाग सांप की तरह घर में बैठे है तो क्या मजाल गरीबों को उनका हक मिल सके।
योजनाओं का हो रहा काला बाजारी कई योजनाओं को निकल कर देखे तो सभी में बड़ी संख्या में गड़बड़ी मिलेंगे।
कमीशन खोरी जो हितग्राहि कैश पेमेंट करेगा उसी को मिलेगी लाभ यही सत्य है। वर्षों से चल रहा धांधली, घुस खोरी
शिकायत करने पर उसी विभाग के अधिकारी जांच करते हैं। और जांच में घर पहुंच कर डरने का काम करते हैं पहले भी फिंगेस्वर ब्लॉक रावण में एक हितग्राहि ने जब बेखौफ होकर इनकी करतूतों की पोल खोली थी तब उस हितग्राही के घर रात 8 बजे उनको धमकाने पहुंचे थे। कई मामले हैं श्रम विभाग के अधिकारी कर्मचारी दलाल के इसलिए गरीब भोले भाले लोग शिकायत करने से डर जाते हैं। श्रम विभाग में लेबर कैटिगरी के व्यक्ति पहुंचते हैं। उन्हें ज्यादा जानकारी नहीं होती है क्योंकि वह मजदूर होते है । जिसका लाभ दलाल विभाग अच्छे से उठते है।
वही श्रम विभाग से हितग्राही गजेश्वर साहू को पिछले 5 साल से पात्र होने के बाद भी योजना का लाभ लेने विभाग का चक्कर लगाना पड़ रहा है विभाग में उसे 2020 से लाभांवित बताया जा रहा है लेकिन हितग्राही के पास योजना से जुड़े श्रम के लिए न सुरक्षा उपकरण किट पहुंचा न कोई राशि वही अधिकारी पांच साल से बजट नही होने का हवाला दे रहे है मामले में पीड़ित योजना के जरिए श्रम विभाग पर भ्रष्टाचार लापरावही का आरोप लगा कर कार्यवाही की मांग कर रहा है।
श्रम विभाग के लापरवाही का खामियाजा भुगत रहे ग्रामीण
फिंगेश्वर के ग्राम बिजली मे सुशासन त्यौहार मे जिला कलेक्टर से लगाई मामले मे जाँच की गईं
फिंगेश्वर
पांच साल से योजना के लाभ से वंचित श्रमिक, श्रम विभाग पर भ्रष्टाचार और लापरवाही का आरोप
हितग्राही ने कलेक्टर से की शिकायत, नहीं मिली आर्थिक सहायता
गरियाबंद। जिले के श्रमिक गजेश्वर साहू को श्रम विभाग की योजना का लाभ पाने के लिए पिछले पांच वर्षों से विभाग के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। पात्र होने के बावजूद उन्हें अब तक न तो सुरक्षा उपकरण किट मिली है और न ही कोई आर्थिक सहायता। जबकि विभागीय रिकॉर्ड में उन्हें वर्ष 2020 से लाभांवित बताया जा रहा है।
गजेश्वर साहू का कहना है कि पोर्टल में नाम होने के बावजूद धरातल पर उन्हें कुछ नहीं मिला। वे लगातार अधिकारियों से संपर्क कर रहे हैं, लेकिन हर बार बजट न होने का हवाला देकर मामला टाल दिया जाता है। इससे आक्रोशित होकर उन्होंने श्रम विभाग पर भ्रष्टाचार और लापरवाही का आरोप लगाते हुए जिला कलेक्टर से मामले की जांच और कार्रवाई की मांग की है।
गजेश्वर साहू, पीड़ित हितग्राही
“मैं पिछले पांच साल से हर महीने दफ्तर जा रहा हूं, लेकिन न किट मिली न पैसे। बस फाइल आगे बढ़ाने की बात होती है। अब तो समझ नहीं आता क्या करूं।”
मिंज ,,,श्रम पदाधिकारी गरियाबंद
“हमारे पास बजट स्वीकृति में देरी हो रही है, इसलिए कुछ लाभार्थियों को योजना के तहत लाभ नहीं मिल पाया है। संबंधित दस्तावेजों की फिर से जांच करवाई जाएगी।”
यह मामला न केवल श्रमिक हितों की अनदेखी को उजागर करता है, बल्कि सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में हो रही लापरवाही और संभावित भ्रष्टाचार पर भी सवाल उठाता है। अभी योजनाओं में बड़ी संख्या में गड़बड़ी आनलाइन आवेदन को निकला जाएगा तो कई भ्रष्टाचार परद दर परद सामने निकल कर आएगी
प्रकाशन करने पर छुरा के एक व्यक्ति पर देवेन्द्र पात्र द्वारा मानहानि लगाया गया है। न्यायालय में विचार धीन है एक पत्रकार सूचना का अधिकार लगाया गया था उसके ऊपर भी विभाग के अधिकारियों द्वारा शिकायत की गई थी विभाग की गोपनीयता भंग किया गया है। कहा गया था। अपर कलेक्टर में कैश चलने के बाद श्रम विभाग के अधिकारी देवेन्द्र पात्र को ही दोषी ठहराया गया है। विभाग में सुधार के लिए लिखा गया है। परन्तु अभी तक किसी प्रकार से नहीं सुधार नहीं।

















