गरियाबंद/छुरा। ग्राम पंचायत मड़ेली में पिछले करीब 8 वर्षों से पदस्थ पंचायत सचिव श्रीमती अंबिका सोनी को हटाने की मांग को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि सचिव की कार्यप्रणाली को लेकर लंबे समय से शिकायतें, ग्रामसभा के प्रस्ताव और जांच के बावजूद अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है। ग्रामीण अब केवल स्थानांतरण नहीं, बल्कि सचिव के कार्यकाल की सूक्ष्म जांच कर दोष पाए जाने पर निलंबन सहित कड़ी विभागीय कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

ग्रामीणों के अनुसार पंचायत के रजिस्टरों का नियमित संधारण नहीं किया जाता, पंचायत कार्यालय में नियमित उपस्थिति नहीं रहती और आवश्यक कार्यों के लिए ग्रामीणों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि सचिव के हस्ताक्षर की आवश्यकता होने पर उन्हें मड़ेली से करीब 12 किलोमीटर दूर उनके गांव तक जाना पड़ता है। 15 अगस्त और 26 जनवरी जैसे राष्ट्रीय पर्वों पर सचिव की कथित अनुपस्थिति को लेकर भी ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं।
ग्रामसभा और पंचायत कार्यों में पारदर्शिता पर सवाल

ग्रामीणों का आरोप है कि ग्रामसभा की प्रक्रिया भी नियमित और पारदर्शी तरीके से नहीं हो रही है। उनका कहना है कि ग्रामसभा में पंचायत के विकास कार्यों, योजनाओं, खर्च और अन्य महत्वपूर्ण विषयों की जानकारी आम ग्रामीणों को मिलनी चाहिए, लेकिन उन्हें जानकारी प्राप्त करने में परेशानी होती है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि सचिव द्वारा सरपंच की बातों को गंभीरता से नहीं लेने तथा ग्रामसभा में पहुंचे ग्रामीणों से कथित रूप से सवाल-जवाब करने जैसी घटनाओं से भी नाराजगी बढ़ी है।
ग्रामसभा में सचिव को हटाने का प्रस्ताव, प्रस्ताव गायब होने का आरोप
लगातार शिकायतों से नाराज ग्रामीणों ने ग्रामसभा में पंचायत सचिव को हटाने का प्रस्ताव पारित किए जाने का दावा किया है। ग्रामीणों का आरोप है कि बाद में उक्त प्रस्ताव उपलब्ध नहीं मिला। इसके बाद ग्रामीणों ने जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी के समक्ष शिकायत की।
शिकायत के बाद जांच अधिकारी गांव पहुंचे। ग्रामीणों का आरोप है कि जांच बिना पूर्व सूचना के की गई और केवल दो लोगों के बयान लेकर जांच पूरी कर दी गई। ग्रामीणों ने इस जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए।
मुख्यमंत्री हेल्पलाइन के बाद फिर जांच
ग्रामीणों ने इसके बाद मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराई। उनका आरोप है कि जांच के दौरान ग्रामसभा अध्यक्ष से कथित रूप से कोरे कागज पर हस्ताक्षर कराए गए तथा बयान जांच अधिकारी द्वारा अपने स्तर पर तैयार किए गए।
ग्रामीणों ने उपसरपंच जसप्रीत सिंह गुरुदत्ता पर भी आरोप लगाया कि ग्रामीणों की पूर्व सहमति के बिना सामूहिक बयान प्रस्तुत किया गया, जिसमें सचिव के कार्यों से ग्रामीणों के संतुष्ट होने और उन्हें मड़ेली में यथावत रखने की बात कही गई। इस मामले को लेकर ग्रामीणों द्वारा अलग बैठक किए जाने की बात भी सामने आई है।
3 अगस्त की जांच में स्थानांतरण की अनुशंसा का दावा
ग्रामीणों के अनुसार मुख्यमंत्री हेल्पलाइन की शिकायत के बाद 3 अगस्त 2026 को पुनः जांच अधिकारी मड़ेली पहुंचे। ग्रामीणों का दावा है कि इस जांच रिपोर्ट में पंचायत सचिव को ग्राम पंचायत मड़ेली से स्थानांतरित कर किसी अन्य पंचायत में पदस्थ किए जाने की अनुशंसा की गई है।
इसके बावजूद सचिव को अब तक नहीं हटाए जाने पर ग्रामीणों ने प्रशासन से सवाल किया है—
“यदि जांच के बाद स्थानांतरण की अनुशंसा की गई है, तो उस पर अब तक अमल क्यों नहीं हुआ?”
अब स्थानांतरण नहीं, पूरे कार्यकाल की सूक्ष्म जांच की मांग
ग्रामीणों का कहना है कि केवल सचिव का स्थानांतरण कर देने से मामला समाप्त नहीं होना चाहिए। उनके अनुसार सचिव के करीब 8 वर्ष के कार्यकाल में पंचायत में हुए कार्यों और लिए गए निर्णयों की सूक्ष्म एवं स्वतंत्र जांच होनी चाहिए।
ग्रामीणों ने पंचायत के रजिस्टर, ग्रामसभा कार्यवाही पुस्तिका, प्रस्ताव पुस्तिका, उपस्थिति, विकास कार्यों से जुड़े दस्तावेज, भुगतान एवं वित्तीय अभिलेख तथा योजनाओं से संबंधित रिकॉर्ड की जांच की मांग की है।
ग्रामीणों का आरोप है कि निष्पक्ष जांच होने पर पंचायत में कथित अनियमितताओं और वित्तीय मामलों से जुड़े तथ्य सामने आ सकते हैं। इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
पंचायत अधिनियम के तहत कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत सचिव की जिम्मेदारियां और पंचायत कार्यालय की व्यवस्था कानून एवं शासन द्वारा निर्धारित नियमों के अनुसार संचालित होनी चाहिए। यदि जांच में कर्तव्य में लापरवाही, अभिलेखों में अनियमितता, ग्रामसभा संबंधी नियमों का उल्लंघन या अन्य गंभीर अनियमितता प्रमाणित होती है तो सक्षम अधिकारी द्वारा सेवा नियमों एवं छत्तीसगढ़ पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए।
ग्रामीणों की मांग है कि जांच पूरी होने तक आवश्यक होने पर सक्षम प्राधिकारी द्वारा सचिव के विरुद्ध निलंबन जैसी अनुशासनात्मक कार्रवाई पर भी नियमानुसार निर्णय लिया जाए।
अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी ग्रामीणों ने उठाए सवाल
ग्रामीणों ने जिला मुख्यालय और विकासखंड स्तर के अधिकारियों पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि लगातार शिकायतों और जांच के बावजूद कार्रवाई में देरी हो रही है। सचिव को बचाने की कोशिश किया जा रहा है
ग्रामीणों का कहना है कि यदि जांच में स्थानांतरण की अनुशंसा हुई है तो प्रशासन को उस पर निर्णय स्पष्ट रूप से बताना चाहिए। कार्रवाई में देरी से ग्रामीणों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि आखिर जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई करने से क्यों बच रहे हैं ?
24 अगस्त को चक्काजाम की चेतावनी
लगातार शिकायतों और जांच के बावजूद कार्रवाई नहीं होने से नाराज ग्रामीणों ने 24 अगस्त 2026 को मड़ेली में चक्काजाम करने की चेतावनी दी है। ग्रामीण कलेक्टर गरियाबंद सहित संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर आंदोलन की सूचना देने की तैयारी में हैं।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें हैं—
- पंचायत सचिव को तत्काल मड़ेली से हटाया जाए।
- 3 अगस्त की जांच में की गई कथित स्थानांतरण अनुशंसा पर तत्काल निर्णय लिया जाए।
- सचिव के करीब 8 वर्षों के कार्यकाल की सूक्ष्म एवं स्वतंत्र जांच कराई जाए।
- पंचायत के वित्तीय और प्रशासनिक अभिलेखों की जांच हो।
- ग्रामसभा और प्रस्ताव पुस्तिका से संबंधित शिकायतों की जांच की जाए।
- राष्ट्रीय पर्वों सहित पंचायत कार्यालय में सचिव की उपस्थिति की जांच हो।
- जांच में आरोप प्रमाणित होने पर नियमानुसार निलंबन एवं कठोर विभागीय कार्रवाई की जाए।

















