गरियाबंद – देवभोग विकासखंड के ग्राम पंचायत मुडागांव में वर्ष 15 मार्च 2007 को राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के अंतर्गत ग्राम रोजगार सहायक के पद पर नियुक्ति हुई थी जिसमे जारी आदेश क्रमांक 2007/163/रायपुर के तहत उधोरांम नागेश पिता हेमलाल नागेश अन्य पिछड़ा वर्ग अनारक्षित विकलांग के कोटे में नियुक्ति हुई थी किसी भी अंग से विकलांग नही होने के वावजूद उधोराम नागेश के द्वारा षडयंत्र पूर्वक फ़र्जी विकलांग प्रमाण पत्र बनाकर शासन प्रसासन को गुमराह कर ग्राम रोजगार सहायक के पद पर चयनित होकर मनरेगा योजना में कई भ्रष्टाचार को अंजाम दिया है जिसके बाद भ्रष्टाचार की परत को दबाने के लिए वर्ष 2014 में ग्राम रोजगार सहायक के पद से स्तीफा देकर जनपद सदस्य के पद पर चुनावी मैदान में उतरा हालांकि चुनावी मैदान में उधोराम नागेश को जनता ने स्वीकार नही किया जिसके बाद उधोराम नागेश ठेकेदारी में अपनी किश्मत चमका रहा है ।

फर्जी विकलांग प्रमाण पत्र से कैसे उठा पर्दा
फर्जी विकलांग बनकर ग्राम रोजगार सहायक बनने वाला उधोराम नागेश के द्वारा बड़ी ही चालाकी के साथ फ़र्जी विकलांग प्रमाण पत्र जिला अस्पताल रायपुर के नाम पर बनाकर एक पैर से विकलांग दर्शया गया है एवम उक्त दिव्यांग प्रमाण पत्र में ओपीडी क्रमांक 26396 अंकित है इधर सूचना के अधिकार के तहत मिली प्राप्त जानकारी के अनुसार जिला चिकित्सालय रायपुर के दिव्यांगता रजिस्टर /जावक रजिस्टर में 16/09/2005 में किसी प्रकार का कोई 26396 का ओपीडी नम्बर अंकित नही है ऐसे में साफ जाहिए हो रहा है कि फर्जी विकलांग प्रमाण पत्र बनाकर उधोराम नागेश शासन प्रसासन को धोखा देकर नोकरी करता रहा ।


वर्ष 2007 में रोजगार सहायक ,2014 में स्तीफा ,फिर जनपद सदस्य का लड़ा चुनाव
फ़र्जी विकलांग प्रमाण पत्र बनाकर नोकरी करने वाला उधोराम नागेश कई किरदार निभाकर शासन को गुमराह किया है वर्ष 2007 में अपने आप को विकलांग बनाकर नोकरी पा लिया फिर कई सारे भ्रष्टाचार को अंजाम देकर अपने आप को पाक साफ जताने के लिए रोजगार सहायक के पद से स्तीफा दे दिया ,स्तीफा देकर जनपद पंचायत देवभोग के जनपद उपाध्यक्ष का सपना संजोए त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के मैदान में जनपद सदस्य के पद पर उतरा हालांकि जनता ने उसे नकार दिया जिसके बाद ठेकेदार बनकर अब राजनीति व ऊंची पहुंच का धौंस देता रहता है ।

फर्जी विकलांग बनने वाला उधोराम नागेश पर कब तक होगी कार्यवाही
फ़र्जी विकलांग बनकर शासन प्रशासन को गुमराह करने वाला उधोराम नागेश पर कब तक कार्यवाही का डंडा चलता है यह देखना होगा लेकिन जितनी चालाकी के साथ उधोराम नागेश के द्वारा अपने आप को नोकरी के लिए विकलांग बना लिया या यूँ कहे फर्जी विकलांग बनाने वाले उस गिरोह का कब तक भंडा फूटता है यह जांच के बाद स्पष्ठ हो पायेगा ।

















