श्री संकल्प छत्तीसगढ़ मिशन हॉस्पिटल में तीन माह गर्भवती दुलेश्वरी की मौत– आखिर जिम्मेदार कौन ?

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जिला गरियाबंद – छुरा ग्राम लोहाझर की 28 वर्षीय दुलेश्वरी पटेल (पति – देवेन्द्र पटेल) की संदिग्ध मौत ने श्री संकल्प छत्तीसगढ़ मिशन छुरा में तीन माह की गर्भवती दुलेश्वरी को बुखार व तबीयत बिगड़ने पर शाम 7 बजे श्री संकल्प छत्तीसगढ़ हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। रात में इलाज शुरू हुआ और अगले दिन दोपहर 12 बजे मौत हो गई ।
सबसे बड़ा सवाल पोस्टमॉर्टम तक क्यों नहीं हुआ ?

परिवार वाले बयान बदलते,

मीडिया से बातचीत में ससुराल पक्ष का दावा “इलाज अच्छा हुआ।”
लेकिन वही परिजन अलग-अलग बातें भी कह रहे हैं
कहीं कहा जा रहा है कि “अचानक तबीयत बिगड़ी”, तो कहीं “8 दिन से तबीयत खराब थी।”
दुलेश्वरी की मां से मिलने की कोशिश पर बताया गया कि वह “गरीब और वृद्ध हैं, बात नहीं कर सकतीं”, जबकि वे दूसरे कमरे में मौजूद थीं । आखिर किस बात को छिपाने की कोशिश ?
एक साल की मासूम बच्ची की मां चली गई… एक मां की कोख उजड़ गई… और जवाब गोल-मोल
दो-ढाई महीने में 5 मौतें – संयोग या सिस्टम की मिलीभगत ?
इसी अस्पताल से जुड़े लगातार मौत के मामले सामने आए

  1. 20 दिसंबर 2025 – सड़क दुर्घटना पीड़ित हेमंत सिन्हा, 9-10 दिन भर्ती के बाद मौत हुई FIR हुई परंतु संकल्प हॉस्पिटल पर किसी प्रकार से कार्रवाई के लिए फिर में नहीं लिखा गया जबकि जिम्मेदार संकल्प हॉस्पिटल भी है
  2. पेट दर्द के बाद सर्जरी – तलेश्वर पटेल,(दुल्ला) ऑपरेशन के दूसरे दिन मौत
  3. दुलेश्वरी पटेल –ग्राम लोहझर 3 माह की गर्भवती, भर्ती के अगले दिन मौत
  4. ग्राम सारागांव की महिला – जहर सेवन, 3 दिन बाद मौत
  5. रानीपरतेवा 24/02/2026 50 वर्षीय बुजुर्ग, रेफर के बाद घर में मौत
    लगातार मौतें… और प्रशासन की चुप्पी
    ग्रामीण पूछ रहे हैं यह अस्पताल है या मौत का इंतज़ार घर ?
    योजना के दावे जमीन पर फेल ?
    सरकार की प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान गर्भवती महिलाओं की सुरक्षा का दावा करती है। फिर तीन माह की गर्भवती महिला की ऐसी मौत क्यों ? क्या योजनाएं सिर्फ कागजों में चल रही हैं ? इसमें मितानिन क्या कर रही थी
    कानूनी शिकंजा कब ?
    यदि जांच में लापरवाही साबित होते ही
  6. भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 धारा 106 लापरवाही से मृत्यु
  7. धारा 125 जीवन को खतरे में डालना Clinical Establishments Act, 2010 लाइसेंस निलंबन/रद्द
  8. राज्य नर्सिंग होम नियम – सील और ब्लैकलिस्ट हो
    दो-ढाई महीने में पांच मौतें…
    हर केस में सवाल…
    पर कार्रवाई शून्य
    ग्रामीणों की मांग मजिस्ट्रेट जांच
    ,अस्पताल की मान्यता की समीक्षा, दोषी डॉक्टरों पर फिर, अस्पताल को ब्लैकलिस्ट किया जाए
    अब निगाहें कलेक्टर और स्वास्थ्य विभाग पर हैं।
    अगर अब भी कार्रवाई नहीं हुई, तो जनाक्रोश सड़कों पर फूट सकता है।
    सवाल सीधा है आखिर कितनी मौतों के बाद सिस्टम जागेगा ?

“परिजन खामोश, पर क्या प्रशासन भी चुप रहेगा?” गर्भवती की मौत पर कलेक्टर से सख्त कार्रवाई की मांग
लोहाझर की 28 वर्षीय गर्भवती दुलेश्वरी पटेल की संदिग्ध मौत के बाद ससुराल पक्ष किसी भी प्रकार की शिकायत या कार्रवाई नहीं चाहता। उनका कहना है कि अस्पताल में “अच्छा इलाज हुआ” और वे किसी तरह की कानूनी प्रक्रिया में नहीं पड़ना चाहते।
लेकिन बड़ा सवाल यह है क्या परिजनों की चुप्पी से प्रशासन की जिम्मेदारी खत्म हो जाती है ?
मामला जुड़ा है श्री संकल्प छत्तीसगढ़ मिशन हॉस्पिटल से, जहां बीते दो-ढाई महीनों में कई मौतों के आरोप सामने आ चुके हैं। ऐसे में यदि परिवार शिकायत नहीं भी करता, तब भी जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को स्वतः संज्ञान लेना चाहिए।
कलेक्टर और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) से मांग:
पूरे मामले की मजिस्ट्रेट जांच
अस्पताल के रिकॉर्ड, डॉक्टरों की ड्यूटी और संसाधनों की जांच
पिछले 6 महीनों की मौतों का मेडिकल ऑडिट
दोषी पाए जाने पर अस्पताल का लाइसेंस निलंबन/रद्द
आवश्यकता पड़ने पर अस्पताल को सील कर ब्लैकलिस्ट किया जाए
कानूनी आधार
Clinical Establishments Act, 2010 के तहत मानकों का उल्लंघन पाए जाने पर पंजीयन निरस्त किया जा सकता है।
भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 106 (लापरवाही से मृत्यु) के तहत आपराधिक प्रकरण दर्ज हो सकता है।
ग्रामीणों का कहना है कि स्वास्थ्य सेवाएं व्यवसाय नहीं, जिम्मेदारी होती हैं। यदि लगातार मौतें हो रही हैं तो यह सिर्फ निजी मामला नहीं, बल्कि जनहित का प्रश्न है।
अब देखना है कि कलेक्टर और स्वास्थ्य अधिकारी इस समाचार को संज्ञान में लेकर कठोर कदम उठाते हैं या फिर एक और मामला फाइलों में दबकर रह जाएगा।
सवाल बरकरार है क्या चुप्पी ही न्याय का अंत है, या प्रशासन जागेगा ?
और भी मरीजों से जानकारी लेने पर कहा गया की रायपुर से डॉक्टर आते है 24 घंटे कोई डॉक्टर नहीं रहते है केवल नर्स के सहारे अस्पताल संचालित है हॉस्पिटल नियमों के अनुसार नहीं दादागिरियों के साथ संचालित हो रही है कई मरीज के परियोजनाओं द्वारा कहा गया कि मरीज से मिलने के लिए नहीं दिया जाता है ताला लगा दिया जाता है कुंडी लगा दिया जाता है दरवाजे में जहां मरीज रहते हैं इस प्रकार से की जाती है

  1. इलाज या लापरवाही? दुलेश्वरी की मौत पर उठे गंभीर सवाल
  2. दो महीने में पांच मौतें – क्या अस्पताल पर है किसी का संरक्षण?
  3. मातृत्व सुरक्षा के दावे फेल, गर्भवती की मौत ने खोली पोल
  4. सवालों के घेरे में श्री संकल्प अस्पताल – मौतों की कड़ी से दहशत
  5. पोस्टमॉर्टम नहीं, जवाब गोलमोल – आखिर क्या छिपा रहा है सिस्टम? गर्भ में तीन माह का जीवन, अस्पताल में थम गई सांसें