गरियाबंद। जिला मुख्यालय गरियाबंद स्थित नगर पालिका क्षेत्र के नया तालाब में गहरीकरण कार्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि तालाब गहरीकरण के नाम पर पिछले कई महीनों से बड़े पैमाने पर मुरूम निकाली जा रही है तथा निकाली गई मुरूम का उपयोग राष्ट्रीय राजमार्ग-130 (NH-130) के निर्माण एवं भराव कार्यों में किया जा रहा है। शिकायतों और समाचार प्रकाशन के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से प्रशासन की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है।

तीन से चार माह से जारी है उत्खनन
आरोप है कि नया तालाब में पिछले तीन से चार माह से लगातार चैन माउंटेन मशीन एवं भारी वाहनों हाईवा के माध्यम से मुरूम निकासी का कार्य किया जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि दिन-रात चल रहे इस कार्य की जानकारी प्रशासन और संबंधित विभागों को नहीं हो, ऐसा संभव नहीं है। इसके बावजूद कार्रवाई का अभाव कई प्रकार की आशंकाओं को जन्म दे रहा है।

कलेक्टर की बैठक में उठा था मामला
सूत्रों के अनुसार जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में आयोजित एक बैठक में भी यह मुद्दा उठाया गया था। बैठक के दौरान नगर पालिका अध्यक्ष एवं मुख्य नगरपालिका अधिकारी (सीएमओ) से पूछा गया कि तालाब गहरीकरण के नाम पर निकाली जा रही मुरूम के लिए क्या विधिवत अनुमति ली गई है।

बताया जाता है कि इस पर नगर पालिका अध्यक्ष द्वारा यह कहा गया कि “तालाब गहरीकरण के लिए मौखिक रूप से अनुमति दी गई है।”
यहीं से सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है कि क्या खनिज संपदा के उत्खनन और उसके अन्य कार्यों में उपयोग के लिए केवल मौखिक अनुमति पर्याप्त है? क्या खनिज विभाग, पर्यावरणीय प्रावधानों और राजस्व नियमों को केवल मौखिक स्वीकृति के आधार पर दरकिनार किया जा सकता है?
खनिज नियमों के पालन पर गंभीर प्रश्न
विशेषज्ञों का मानना है कि तालाब गहरीकरण अलग विषय है, जबकि निकाली गई मुरूम का निर्माण कार्यों में उपयोग खनिज नियमों के दायरे में आता है। यदि मुरूम का उपयोग किसी सड़क, हाईवे अथवा अन्य निर्माण कार्य में किया गया है तो उसके लिए नियमानुसार अनुमति, माप, परिवहन और रॉयल्टी भुगतान की प्रक्रिया आवश्यक होती है।
यदि यह प्रक्रिया नहीं अपनाई गई है तो यह शासन के राजस्व को नुकसान पहुंचाने वाला गंभीर मामला हो सकता है।
NH-130 में उपयोग की जांच आवश्यक
स्थानीय लोगों का आरोप है कि नया तालाब से निकाली गई मुरूम को राष्ट्रीय राजमार्ग-130 के कार्य में डाला गया है। ठेकेदार से यह स्पष्ट कराया जाना चाहिए कि उपयोग की गई मुरूम का स्रोत क्या था तथा उसके लिए रॉयल्टी एवं अन्य वैधानिक शुल्क जमा किए गए थे या नहीं।
यदि बिना वैधानिक प्रक्रिया के खनिज का उपयोग किया गया है तो संबंधित एजेंसी एवं ठेकेदार के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई होना आवश्यक है।
भौतिक सत्यापन और घनमीटर माप की मांग
नागरिकों ने मांग की है कि नया तालाब का स्वतंत्र भौतिक सत्यापन कराया जाए तथा वैज्ञानिक पद्धति से यह आकलन किया जाए कि कुल कितने घनमीटर (Cubic Meter) मुरूम निकाली गई है।
इसके बाद निकाली गई मुरूम की वास्तविक मात्रा निर्धारित की जाए।
शासन को हुए राजस्व नुकसान का आकलन किया जाए।
देय रॉयल्टी की गणना की जाए।
अवैध उत्खनन प्रमाणित होने पर जुर्माना लगाया जाए।
जिम्मेदार अधिकारियों एवं संबंधित पक्षों पर विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाए।
जिला मुख्यालय में ही नियमों की अनदेखी?
सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि यदि यह कार्य नियमों के विपरीत हो रहा था तो जिला मुख्यालय में बैठे जिम्मेदार अधिकारियों ने समय रहते हस्तक्षेप क्यों नहीं किया? जिला मुख्यालय में कलेक्टर खनिज विभाग के जिला अधिकारी मौजूद हैं। ऐसे में महीनों तक चलने वाले उत्खनन पर कार्रवाई नहीं होना प्रशासनिक निगरानी पर भी प्रश्न खड़े करता है।
जिला खनिज अधिकारी का जवाब
मामले को लेकर जिला खनिज अधिकारी अर्चना ठाकुर से चर्चा की गई। नया तालाब में मुरूम उत्खनन और उसके उपयोग को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने संक्षिप्त प्रतिक्रिया देते हुए कहा:
“ठीक है, मैं दिखवाती हूं।”
जनता पूछ रही है जवाब
नया तालाब से कुल कितनी मुरूम निकाली गई?
क्या खनिज विभाग से लिखित अनुमति ली गई थी?
यदि अनुमति थी तो दस्तावेज सार्वजनिक क्यों नहीं किए जा रहे?
निकाली गई मुरूम NH 130 सड़क निर्माण कार्य में उपयोग की गई?
क्या उसकी रॉयल्टी जमा की गई?
यदि नहीं, तो शासन को हुए नुकसान की भरपाई कौन करेगा?
शिकायतों के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
अब जिले की जनता की निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं। लोगों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर सत्य को सार्वजनिक किया जाए तथा यदि किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित ठेकेदार, जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित पक्षों के विरुद्ध नियमों के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाए।

















