आदिवासी बालक आश्रम गरियाबान से काम पूरा होने के बाद तीनों को बिना किसी पूर्व सूचना के बाहर निकाल दिया गया। सबसे गंभीर बात यह है कि जितने दिनों तक काम कराया गया, उसकी मजदूरी भुगतान नहीं किया गया।

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आदिवासी बालक आश्रम गरियाबान से काम पूरा होने के बाद तीनों को बिना किसी पूर्व सूचना के बाहर निकाल दिया गया। सबसे गंभीर बात यह है कि जितने दिनों तक काम कराया गया, उसकी मजदूरी भुगतान नहीं किया गया।

एफआईआर और कार्रवाई पर सवाल

पीड़ितों का आरोप है कि इस पूरे मामले में विभागीय अधिकारी और संबंधित अधीक्षक की भूमिका संदिग्ध है, लेकिन उनके खिलाफ अब तक कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई। वहीं, जिन आला अधिकारियों के माध्यम से पीड़ितों को काम पर रखा गया, उनके विरुद्ध भी किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं हुई है।

पीड़ितों का कहना है कि शिकायत करने के बावजूद जिम्मेदारों पर कार्रवाई न होना, प्रशासनिक संरक्षण की ओर इशारा करता है।

श्रम विभाग पहुंचे पीड़ित

मजदूरी भुगतान नहीं होने से परेशान होकर तीनों पीड़ित श्रम विभाग कार्यालय पहुंचे और अपने-अपने कार्य दिवसों की मजदूरी भुगतान के लिए आवेदन दिया है। पीड़ितों ने श्रम विभाग से शीघ्र जांच कर बकाया मजदूरी दिलाने की मांग की है।

धमकी देने का नया आरोप

इस मामले में अब एक और गंभीर मोड़ सामने आया है।
ग्राम अतरमारा निवासी खोमेश साहू ने आरोप लगाया है कि जब उन्होंने मजदूरी और ठगी की रकम को लेकर आवाज उठाई, तो हॉस्टल अधीक्षक नरेंद्र सोनवानी उनके घर आकर धमकी देकर डराया।

खोमेश साहू का कहना है कि उन्हें यह कहा गया कि यदि उन्होंने शिकायत करना या किसी का नाम लेना जारी रखा, तो उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। इस घटना के बाद तीनो पीड़ित और उनका परिवार भय के माहौल में जीने को मजबूर है।

न्याय की मांग

पीड़ितों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि नौकरी के नाम पर हुई 7.70 लाख की ठगी की निष्पक्ष जांच कराई जाए,

सरपंच पति, अधीक्षक एवं संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच हो,

पीड़ितों ने कहा पूरी मजदूरी का तत्काल भुगतान कराया जाए,

दोषियों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।

इस मामले के सामने आने के बाद क्षेत्र में नाराजगी का माहौल है और लोग प्रशासन से ठोस कदम उठाने की मांग कर रहे हैं।

गरीबों की आवाज ?

देखना है कि न्याय पर भरोसा रहेगी या दम तोड़ती नजर आएगी
क्या फाइलों में धूल खाती नजर आएगी