जिला गरियाबंद छत्तीसगढ़ मानव अधिकार फाउंडेशन के संस्थापक श्री लव कुमार रामटेके के मार्गदर्शन पर गरियाबंद जेल में

कैदियों की स्थिति का जायजा
लिया गया छत्तीसगढ़ राज्य मानव अधिकार जिलाध्यक्ष महेंद्र गंधर्व जिला कोषाध्यक्ष हुमेंद्र लोहले उपाध्यक्ष गीतम पटेल मानव अधिकार वरिष्ठ दीपिका बराई ,वरिष्ठ सदस्य शेखर साहू,वरिष्ठ पत्रकार उरेन्द्र साहू, शारदा वर्मा व टीम ने गरियाबंद जेल में औचक निरीक्षण किया, जिसका उद्देश्य जेल में बंद कैदियों के मानवाधिकारों और उनकी जीवन की स्थिति का मूल्यांकन करना था. यह निरीक्षण जेल प्रशासन को बिना किसी पूर्व सूचना के किया गया, ताकि वास्तविक स्थिति का पता लगाया जा सके.
निरीक्षण टीम का नेतृत्व जिलाध्यक्ष महेंद्र गंधर्व ने किया, जिन्होंने जेल के विभिन्न हिस्सों का दौरा किया. इस दौरान, उन्होंने बैरकों, रसोईघर, चिकित्सा सुविधाओं और शौचालयों का गहनता से निरीक्षण किया. टीम ने व्यक्तिगत रूप से कई कैदियों से बातचीत की और उनकी समस्याओं और शिकायतों को सुना.
मुख्य निष्कर्ष

स्वास्थ्य और स्वच्छता: टीम ने जेल के भीतर की सफाई व्यवस्था और कैदियों को मिलने वाली चिकित्सा सुविधाओं की समीक्षा की चिकित्सा सुविधाएँ संतोषजनक थीं भोजन की गुणवत्ता: टीम ने रसोईघर का निरीक्षण किया और कैदियों को दिए जाने वाले भोजन की गुणवत्ता की जांच की. उन्होंने खाने के नमूने भी लिए और भोजन तैयार करने की प्रक्रिया का अवलोकन किया.
कानूनी सहायता कैदियों को मिलने वाली कानूनी सहायता के संबंध में भी पूछताछ की गई. यह सुनिश्चित किया गया कि उन सभी को अपने मामलों की जानकारी है और उन्हें वकील की सहायता मिल रही है.
निरीक्षण के बाद,जिलाध्यक्ष महेंद्र गंधर्व ने मीडिया से बात करते हुए कहा, गरियाबंद जेल में कैदियों के मानवाधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करना हमारी प्राथमिकता है. निरीक्षण के दौरान सामने आए मुद्दों पर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी, और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक सुधार के लिए निर्देश दिए जाएंगे जेल अधीक्षक रवि कुमार भूआर्य ने आयोग के निरीक्षण का स्वागत किया और कहा कि वे छत्तीसगढ़ मानव अधिकार द्वारा दिए गए सभी सुझावों पर गंभीरता से काम करेंगे. उन्होंने यह भी कहा कि उनका प्रशासन कैदियों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है इस तरह के औचक निरीक्षण का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जेल केवल दंड देने के स्थान न होकर, सुधार गृह के रूप में कार्य करें और वहां मानव आधिकारों का सम्मान हो.

















