आदिम जाति सेवा समिति नागाबुड़ा में धान खरीदी में भारी अनियमितता, लाखों की गड़बड़ी के आरोप
नागाबुड़ा।
आदिम जाति सेवा समिति मर्यादित, नागाबुड़ा (पंजीयन क्रमांक 60, आईडी नंबर 51000502) में धान खरीदी के दौरान गंभीर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। समिति के प्रबंधक पर शासन द्वारा निर्धारित नियमों की अनदेखी कर लेन-देन के माध्यम से खराब, बोदरा एवं गुणवत्ताहीन धान की खरीदी कर लाखों रुपये की गड़बड़ी किए जा रहे है नागाबुड़ा समिति

सूत्रों के अनुसार शासन के स्पष्ट निर्देश हैं कि धान खरीदी 13 से 17 प्रतिशत नमी के बीच ही की जानी चाहिए, लेकिन नागाबुड़ा समिति में इन नियमों को दरकिनार करते हुए 10, 11, 12, 18 व 19 प्रतिशत नमी वाले धान की खरीदी की गई। आरोप है कि अधिक नमी वाला बोदरा एवं कम नमी वाला गुणवत्ताहीन धान भी खरीदी में शामिल किया गया, जिससे भविष्य में धान खराब होने की पूरी संभावना है और बाद में समिति द्वारा प्रशासन को नुकसान दर्शाने की स्थिति बन सकती है। इससे शासन की राशि के दुरुपयोग की आशंका जताई जा रही है।

तौल प्रक्रिया में भी अनियमितता
किसानों का आरोप है कि समिति में धान तौल प्रक्रिया में गंभीर गड़बड़ी की जा रही है। तौल के दौरान सामान्य किसानों से निर्धारित मात्रा से अधिक धान लिया जा रहा है, जबकि अपने परिचितों या चुनिंदा लोगों से कम तौल की जा रही है। इससे एक ओर किसानों का आर्थिक नुकसान हो रहा है, वहीं दूसरी ओर समिति के रिकॉर्ड में हेराफेरी की संभावना बढ़ रही है।

एक व्यापारी/किसान को विशेष लाभ का आरोप
बताया जा रहा है कि केवल एक व्यापारी/किसान का धान, जिसकी नमी 10, 11, 12, 18 व 19 प्रतिशत बताई जा रही है, उसे नियमों को नजरअंदाज कर प्राथमिकता के साथ खरीदा गया। इस संबंध में जब समिति प्रभारी छोटू सोनवानी से मीडिया द्वारा यह जानना चाहा गया कि यह धान किस किसान का है, तो उन्होंने कोई जानकारी देना उचित नहीं समझा।

17 दिसंबर 2025 की खरीदी पर सवाल
दिनांक 17 दिसंबर 2025 को समिति में धान टोकन वाले कुल 25 किसान उपस्थित थे। आरोप है कि प्रबंधक एवं समिति प्रभारी की आपसी मिलीभगत से नियमों के विपरीत तरीके से धान खरीदी की गई, जिससे पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

शिकायतों के बावजूद कार्रवाई शून्य
नागाबुड़ा समिति में धान खरीदी को लेकर कई बार शिकायतें की जा चुकी हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। हैरानी की बात यह है कि कलेक्टर के निर्देशों का भी समिति प्रबंधन पर कोई असर नहीं दिखाई दे रहा है।

दूसरी समिति की जिम्मेदारी भी उसी प्रबंधक को
ग्रामीणों में इस बात को लेकर भी नाराजगी है कि नागाबुड़ा समिति में लगातार गड़बड़ियों के आरोपों के बावजूद उसी प्रबंधक को गुजरा समिति की भी जिम्मेदारी सौंप दी गई है, जिसका आईडी नंबर 51000501 बताया जा रहा है। इससे प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं।
ग्रामीणों एवं किसानों में इस पूरे मामले को लेकर भारी आक्रोश है। उन्होंने मांग की है कि धान खरीदी की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो तथा भविष्य में धान खरीदी प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाए।
निरिक्षण प्रभारी तरुण कश्यप ने धान खरीदी समिति के प्रभारी छोटू सोनवानी को कहा की लगातार शिकायत होने पर भी वही काम कर रहे हो
प्रबंधक यशपाल फोन नहीं उठाये

















