जिला गरियाबंद मुख्यालय से लगा हुआ ग्राम केशोडार में वन मार्ग कीचड़ से भरा हुआ वन विभाग के SDO मनोज चंद्राकर देवभोग स्थानांतरण होने पर भी जिला मुख्यालय में अभी तक सरकारी क्वार्टर खाली नहीं किए आज तक जिला मुख्यालय में स्थित होकर हस्तक्षेप कर रहे। SDO मनोज चंद्राकर, रेंजर पुष्पेंद्र साहू, देवेन्द्र तिवारी द्वारा बनाई गई रोड

ग्राम केशोडार WBRM रोड में लाखों की हेराफेरी जिसका जीता जागता गड्ढे में तब्दील रोड देख सकते हैं सूचना तंत्र के मुताबिक 20 लाख रुपए की रोड गड्ढे में तब्दील हो चुका। केवल गिट्टी को छिड़काव कर बिल भुगतान फर्जीवाड़ा तरीके से किया है SDO मनोज चंद्राकर द्वारा जब रोड की स्वीकृत आदेश आई तो सबसे पहले काम किया गया रोड में समतली करण मुरूम से नहीं किया गया राजस्थानी टैक्टर लाकर पुराने रोड को उखाड़ कर समतली करण किया गया एक परत मिट्टी डालकर रोड में छिड़काव किया गया कहीं-कहीं पर मुरूम भी छिड़काव भी

किया गया चना मुर्रा की तरह रोड़ में गिट्टी मुरूम डाला गया 2 वर्ष के अंदर में ही रोड की स्थिति कहीं-कहीं पर एक फिट तक रोड में गद्दे है। डब्ल्यूबीआरएम रोड अगर 2 वर्ष में गड्ढे हो जाती है तो यह समझ सकते हैं भ्रष्टाचार से भरा हुआ वन विभाग के कर्मचारी विभाग को बदनाम कर रहे हैं। वन विभाग के एसडीओ निरीक्षणकर्ता, ठेकेदार एवं इंजीनियर बन जाते हैं SDO स्वयं मूल्यांकनकर्ता है तो जांच कौन करेगा, जबकि PWD इंजियर के द्वारा मूल्यांकन भौतिकी सत्यापन होनी चाहिए। SDO मनोज चंद्राकर मलाई स्वयं खाई, चना मुर्रा की तरह रोड़ में गिट्टी मुरूम डाला गया। जीता जागता गड्ढे तब्दील रोड केशोडार फॉरेस्ट रोड

वन विभाग के कर्मचारी अधिकारी संलिप्त हैं सैया बने कोतवाल तो डर काहे का कौन करेगा जांच लीपापोती 5 वर्षों से लाखों रुपए प्रत्येक वर्ष ग्राम केशोडार रोड के नाम पर निकल कर खा जाते है भ्रष्टाचार पर अंकुश लगने का नाम ही नहीं ग्राम केशोडार में ऐसे कई कार्य में लिप्त मनोज चंद्राकर SDO, ठेकेदार, इंजियर बन कर गरियाबंद जिला वन विभाग को खोखला कर रहे है सूक्ष्म जांच के साथ-साथ मूल्यांकन भौतिकी सत्यापन होनी चाहिए। जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई नहीं होने से बुलंद हौसले बढ़ते ही जा रहे हैं।

PWD इंजियर से भौतिकी सत्यापन होनी चाहिए।
SDO मनोज चंद्राकर फारेस्ट विभाग के खुद खाई मलाई रोड़ में गिट्टी मुरूम छिड़काव किया गया जिस प्रकार से लोग आंगन में गोबर की छड़ा देते है उसी प्रकार से मुरूम गिट्टी छड़ा डाला कर लाखों डकारे गए *सड़क नहीं गड्ढे की तोफ़ा मिल रही ग्राम केशोडार को जनता की परेशानी बढ़ी। कई बार एक्सीडेंट हुई कई गाड़ियों की शाकब खराब हो गई गाड़ी की एलाइनमेंट हर 15 दिन में किया जाता है जनता के लाखों रुपए अपने गाड़ी बनाने में लग जाते हैं वन विभाग गरियाबंद विकास के नाम पर लाखों डकारे जाते हैं।

पक्की और अच्छी सड़क बन जाने से इनके प्रत्येक 6, माह में लाखों रुपए डकार कैसे पाएंगे इनकी आमदनी काम हो जाएगी इसके कारण वन विभाग का रोड है यह कहकर विकास पर रोक लगाया जा रहा है यहां तक की ग्राम केशोडार में 90% आदिवासी कमर जनजाति के लोग निवासरत हैं परंतु लाखों रुपए निकल कर खा लिया जाता है वन विभाग लाखों रुपए डकार कर बैठे हुए हैं। वन विभाग SDO द्वारा पर्व DFO ने वन विभाग रोड है परंतु वहीं कई ऐसे कारनामे करके बैठी है जो समय-समय पर प्रकाशन किया जाएगा।

- केशोडार रोड –WBRM बनाए गए 2 वर्षों के लगभग आज रोड की स्थिति बदहल नाव की तरह चलने पर मजबूर जीता जागता गड्ढे में सड़क की तस्वीर
- केशोडार पुल – जो नागिन की तरह लहराती हुई पुल 20 लाख की जो एक बार बनाए थे एक बारिश आने पर बह कर भ्रष्टाचार की पोल खोल दी थी फिर दूसरी बार बनाई गई परंतु लहरी हुई पुल जिता जागता उदाहरण है।
इतना ही नहीं केशोडार रोड में एक गाड़ी की पासिंग के लिए बहुत ही संघर्ष करना पड़ता है कभी-कभी गाड़ियों आगे पीछे करके जाना पड़ता है। रोड की चौड़ाई की कमी है गाड़ी आर-पार जाने की जगह नहीं है और भी कारनामों की गिनती इतनी लिस्ट बड़ी है कि एक बार में बता नहीं सकते।
इतना अच्छा कार्य करने वाले SDO मनोज चंद्राकर के स्थानांतरण 31/07/2025 को देवभोग हो गया है। आज भी जिला मुख्यालय में है

SDO की लीपपोती पर सवाल जनता की पूर्व में जांच पर बाधा डाला जाता था क्योंकि पूर्व मुख्यमंत्री के रिश्तेदार कह कर किए कार्य की जानकारी नहीं दी जाती है। फॉरेस्ट विभाग में किया गया कार्य में बड़ी गड़बड़ी है। उच्च स्तर पर जांच टीम गठित होकर जांच होनी चाहिए। PWD इंजियर से मूल्यांकन, भौतिकी सत्यापन होनी चाहिए ।

















