गरियाबंद जल जीवन मिशन पर बड़ा सवाल फाइलों में 80%, गांवों में नल सूखे
करोड़ों की योजना पर उठे सवाल, कहीं टंकी लीक तो कहीं नलों में पानी नहीं सरायपानी में दो साल से इंतजार
गरियाबंद ग्रामीण परिवारों के घर तक नल से स्वच्छ पेयजल पहुंचाने के उद्देश्य से चलाए जा रहे जल जीवन मिशन की जमीनी स्थिति को लेकर गरियाबंद जिले में गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों से लगातार ऐसी शिकायतें सामने आने की बात कही जा रही है कि कहीं पानी की टंकी में लीकेज है, कहीं पाइपलाइन बिछने के बावजूद नलों में पानी नहीं पहुंच रहा है और कहीं पुराने जलस्रोत अथवा पुरानी पाइपलाइन को ही नई योजना से जोड़कर काम पूरा होने का दावा किया गया है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि जमीन पर योजना अधूरी या बंद पड़ी है, तो माप पुस्तिका (MB), निरीक्षण, सत्यापन, ट्रायल रन, पूर्णता प्रमाण-पत्र और भुगतान की प्रक्रिया किस आधार पर पूरी हुई ?

सरायपानी बना सबसे बड़ा सवाल
गरियाबंद जिले के मैनपुर क्षेत्र के ग्राम पंचायत सरायपानी में ग्रामीणों के अनुसार जल जीवन मिशन के तहत पानी की टंकी का निर्माण तो दिखाई देता है, लेकिन पिछले करीब दो वर्षों से ग्रामीणों को इस योजना से नियमित नल जल उपलब्ध नहीं हो पाया है।
ग्रामीणों का कहना है कि घरों के सामने लगाए गए नल कई जगह केवल शोपीस बनकर रह गए हैं। योजना शुरू होने और पूर्ण होने की जानकारी वाला बोर्ड भी मौके पर स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देता, जिससे ग्रामीणों के लिए यह पता लगाना मुश्किल है कि काम कब स्वीकृत हुआ, कब शुरू हुआ, किस ठेकेदार को दिया गया, कितनी राशि स्वीकृत हुई और भुगतान कितना हुआ।
ग्रामीणों के मुताबिक योजना के नाम पर फोटो और कागजी प्रक्रिया पूरी किए जाने के बावजूद वास्तविक जलापूर्ति आज भी सवालों के घेरे में है।
फाइलों में 80 प्रतिशत, जमीन पर कितना ?
जल जीवन मिशन के संबंध में जिले में यदि सरकारी रिकॉर्ड में किसी ग्राम या क्षेत्र में 80 प्रतिशत अथवा उससे अधिक कार्य पूर्ण दर्शाया गया है, तो उसका वास्तविक भौतिक सत्यापन बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है।
सवाल यह है

क्या 80 प्रतिशत कार्य का अर्थ वास्तव में 80 प्रतिशत घरों में नियमित पानी पहुंचना है ?
क्योंकि केवल टंकी खड़ी कर देना, पाइप बिछा देना या नल लगा देना अपने आप में अंतिम परिणाम नहीं है। आधिकारि दिशा-निर्देशों में योजना के क्रियान्वयन में ट्रायल रन, योजना का कमीशन और जलापूर्ति व्यवस्था के संचालन जैसे चरणों का भी उल्लेख है।
भुगतान हुआ तो किस आधार पर ?
इस मामले का सबसे महत्वपूर्ण बिंदु सरकारी भुगतान है।
जल जीवन मिशन के आधिकारि दिशा-निर्देशों में कार्य के माप, निरीक्षण और भुगतान की प्रक्रिया निर्धारित की गई है। दिशा-निर्देशों में यह भी कहा गया है कि कार्यों के लिए थर्ड-पार्टी निरीक्षण एवं प्रमाणन भुगतान से पहले आवश्यक है।
ऐसे में सराईपानी सहित उन गांवों की जांच जरूरी है जहां पानी नहीं पहुंच रहा है।
क्या ठेकेदार को पूर्ण अथवा पर्याप्त भुगतान किया जा चुका है ?
यदि भुगतान हो चुका है तो
- माप पुस्तिका में कितना कार्य दर्ज है ?
- किस अधिकारी ने माप का सत्यापन किया ?
- थर्ड-पार्टी निरीक्षण किस एजेंसी ने किया ?
- निरीक्षण रिपोर्ट में क्या पाया गया ?
- ट्रायल रन कब हुआ ?
- पूर्णता प्रमाण-पत्र किसने जारी किया?
- कितने घरेलू नल कनेक्शन वास्तव में चालू हैं ?
- कितने घरों में नियमित पानी पहुंच रहा है ?
- भुगतान किस-किस बिल के आधार पर किया गया ?
इन सवालों का जवाब सार्वजनिक होना चाहिए।
सरपंच की NOC से लेकर विभागीय सत्यापन तक जांच जरूरी
जल जीवन मिशन में ग्राम पंचायत और उसकी संबंधित समिति की भी महत्वपूर्ण भूमिका निर्धारित की गई है। आधिकारि व्यवस्था में ग्राम पंचायत/पानी समिति को योजना के नियोजन, क्रियान्वयन, संचालन और रखरखाव में भूमिका दी गई है।
इसलिए यदि किसी ग्राम पंचायत में योजना पूर्ण बताई गई है, लेकिन ग्रामीणों को पानी नहीं मिल रहा, तो केवल ठेकेदार ही नहीं बल्कि संबंधित विभागीय अधिकारियों, तकनीकी अधिकारियों, निरीक्षण एजेंसी और ग्राम पंचायत स्तर पर जारी प्रमाण-पत्रों की भी दस्तावेजों के आधार पर जांच होनी चाहिए।
जांच में सामने आनी चाहिए पूरी तस्वीर
गरियाबंद जिले में जल जीवन मिशन की स्वतंत्र और भौतिक जांच कराई जाए तो प्रत्येक गांव में यह देखा जाना चाहिए
अब जिम्मेदारी तय करने का समय
यदि जांच में यह प्रमाणित होता है कि किसी योजना को रिकॉर्ड में पूर्ण बताया गया, भुगतान किया गया या प्रमाणित किया गया, जबकि मौके पर निर्धारित कार्य नहीं हुआ अथवा योजना चालू नहीं थी, तो संबंधित अधिकारियों और जिम्मेदार एजेंसियों की भूमिका की विभागीय जांच आवश्यक होगी।
दस्तावेजों में गलत जानकारी, गलत माप, गलत प्रमाणन या सरकारी राशि के अनुचित भुगतान की स्थिति में लागू सेवा नियमों, अनुबंध की शर्तों और वित्तीय/दंडात्मक कानूनों के तहत कार्रवाई का प्रश्न उठ सकता है। हालांकि किसी व्यक्ति को दोषी ठहराने से पहले सक्षम जांच एजेंसी द्वारा रिकॉर्ड, MB, बिल, निरीक्षण रिपोर्ट और मौके की वास्तविक स्थिति का मिलान करना जरूरी है।
प्रशासन से सीधे सवाल
गरियाबंद जिला प्रशासन और संबंधित जल संसाधन/लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग से सवाल है
जब गांव में पानी नहीं पहुंच रहा तो फाइलों में योजना कितनी पूर्ण है ?
अगर भुगतान हो चुका है तो भुगतान किस आधार पर हुआ?
अगर थर्ड-पार्टी निरीक्षण हुआ तो रिपोर्ट क्या कहती है?
अगर योजना पूर्ण है तो सराईपानी के ग्रामीणों को दो वर्षों से पानी क्यों नहीं मिला?
और सबसे महत्वपूर्ण—
क्या गरियाबंद जिले में जल जीवन मिशन की सभी पूर्ण दर्शाई गई योजनाओं का मौके पर पुनः भौतिक सत्यापन कराया जाएगा?
ग्रामीणों को कागजों में नहीं, वास्तव में नल से पानी चाहिए।
जल जीवन मिशन की आधिकारिक व्यवस्था का उद्देश्य ग्रामीण घरों तक नल से पेयजल पहुंचाना है; योजना की पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए सरकारी दिशा-निर्देश सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हैं।
















