ऑक्सीजन की कमी से मौत के बाद खुली पोल लॉज से बना “सोमेश्वर हॉस्पिटल” आखिर कैसे मिला लाइसेंस ?

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गरियाबंद। जिले के चर्चित सोमेश्वर हॉस्पिटल में कथित लापरवाही और मूलभूत सुविधाओं के अभाव ने एक युवक बसंत देवांगन की जान ले ली। आरोप है कि अस्पताल में ऑक्सीजन की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण मरीज की हालत बिगड़ी और अंततः उसकी मौत हो गई। इस घटना के बाद 06 मार्च 2026 को प्रशासन ने अस्पताल का लाइसेंस निलंबित कर उसे बंद करा दिया।


मामले ने अब कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बताया जा रहा है कि जिस भवन में अस्पताल संचालित हो रहा था, वह पहले एक लॉज के रूप में उपयोग में था। बाद में उसे बिना पर्याप्त बदलाव और मानकों के अनुरूप विकसित किए ही नहीं कर अस्पताल के रूप में संचालित किया जाने लगा।

नियमों की खुली अनदेखी


नर्सिंग होम अधिनियम के तहत अस्पताल में जिन बुनियादी सुविधाओं का होना अनिवार्य है, वे यहां नदारद बताई जा रही हैं। आरोपों के अनुसार
अस्पताल में पर्याप्त ऑक्सीजन और वेंटिलेशन की सुविधा नहीं थी
डॉक्टरों और प्रशिक्षित स्टाफ की कमी थी
जनरेटर/बैकअप बिजली की व्यवस्था नहीं थी
छोटे-छोटे कमरों में मरीजों को भर्ती किया जाता था
अस्पताल रोड से सटा होने के कारण शोर-शराबे से मरीजों को परेशानी होती थी
पार्किंग और आपातकालीन व्यवस्था का अभाव था
इन सभी कमियों के बावजूद मरीजों को भर्ती कर इलाज किया जाना सीधे तौर पर नियमों का उल्लंघन माना जा रहा है।
सबसे बड़ा सवाल—लाइसेंस कैसे मिला ?
अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब अस्पताल में बुनियादी सुविधाएं ही उपलब्ध नहीं थीं, तो आखिर इसे लाइसेंस कैसे जारी किया गया? आरोप यह भी लग रहे हैं कि संबंधित अधिकारियों द्वारा नियमों की अनदेखी कर अस्पताल को अनुमति दी गई।
स्थानीय लोगों और परिजनों की मांग है कि केवल अस्पताल प्रबंधन ही नहीं, बल्कि जिम्मेदार अधिकारियों खासकर स्वास्थ्य विभाग—पर भी कड़ी कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि यदि समय रहते जांच और निगरानी होती, तो शायद एक जान बचाई जा सकती थी।
प्रशासन की कार्रवाई और आगे की मांग
फिलहाल प्रशासन ने अस्पताल का लाइसेंस निलंबित कर दिया है, लेकिन लोगों का कहना है कि यह पर्याप्त नहीं है। दोषियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की लापरवाही से किसी और की जान न जाए।