बंद अस्पताल को खोलने की कोशिश ‘सोमेश्वर हॉस्पिटल’ पर सियासी दबाव के आरोप, गुपचुप बैठकों से गरमाया मामला

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गरियाबंद। लाइसेंस
निलंबन के बाद बंद पड़े सोमेश्वर हॉस्पिटल को दोबारा शुरू कराने की कोशिशों ने जिले में नया विवाद खड़ा कर दिया है। सूत्रों के अनुसार, अस्पताल को खुलवाने के लिए राजनीतिक स्तर पर लगातार बैठकें की जा रही हैं पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में और प्रशासन पर दबाव बनाए जाने के आरोप सामने आ रहे हैं।
जानकारी यह भी मिल रही है कि कुछ मंत्रियों के करीबी लोगों द्वारा इस विषय में बैठक ली गई, वहीं एक भाजपा नेता के दुकान पर भी इस मुद्दे को लेकर चर्चा हुई। इन बैठकों में अस्पताल को फिर से चालू कराने के लिए रणनीति बनाई गई बताई जा रही है।
सूत्र बताते हैं कि इन बैठकों में सोमेश्वर हॉस्पिटल के संचालक कोमल सिन्हा भी मौजूद रहे, जिन्होंने अस्पताल को दोबारा खोलने के लिए लोगों से समर्थन मांगा


दो गुटों में बंटे लोग और नेता
इस मामले में स्थानीय स्तर पर मतभेद भी साफ नजर आ रहा है।
एक पक्ष का कहना है कि जिस अस्पताल में इतनी बड़ी लापरवाही हुई और एक युवक की मौत हुई, उसे दोबारा खोलना जनता के साथ अन्याय होगा।
वहीं दूसरे पक्ष के कुछ नेता अस्पताल को फिर से चालू करने के पक्ष में हैं, उनका तर्क है कि सुधार के बाद संचालन की अनुमति दी जा सकती है।
कानूनी स्थिति पर भी सवाल
डॉक्टर हरीश चौहान सर्जन ने बाइट देते हुए कहा है कि एक बार इस प्रकार के गंभीर मामलों में अस्पताल का लाइसेंस निलंबित/निरस्त हो जाने के बाद उसे दोबारा खोलना नियमों के विपरीत है।
हालांकि, स्वास्थ्य विभाग के नियमों के अनुसार यदि संचालक सभी आवश्यक कमियों को दूर कर पुनः आवेदन करता है और जांच में मानकों का पालन पाया जाता है, तो नए सिरे से लाइसेंस दिए जाने की प्रक्रिया संभव हो सकती है।
अब नजर प्रशासन पर
पूरे मामले में अब सबकी निगाहें प्रशासन पर टिकी हुई हैं कि वह दबाव में निर्णय लेता है या नियमों के अनुसार कड़ी कार्रवाई जारी रखता है।
जनता के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है
क्या लापरवाही से जुड़ा यह अस्पताल दोबारा खुलेगा ?
या फिर सख्ती के साथ इसे स्थायी रूप से बंद रखा जाएगा ?
यह आने वाला समय ही तय करेगा कि कानून और जनहित भारी पड़ता है या फिर दबाव की राजनीति।