जिला गरियाबंद मुख्यालय से लगभग 8 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम पंचायत चिखली में इन दिनों अवैध मुरूम खनन का बड़ा खेल खुलेआम चल रहा है। हैरानी की बात यह है कि शुक्रवार से लगातार तीन दिनों तक सुबह से लेकर देर रात तक जेसीबी के माध्यम से मुरूम की खुदाई की जा रही है, लेकिन प्रशासन मानो गहरी नींद में सोया हुआ है।

ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार गांव के कुछ लोगों द्वारा यह कहकर मुरूम बेचा जा रहा है कि गांव में तालाब का निर्माण और गहरीकरण किया जाएगा। विकास और गांव के हित का झांसा देकर ग्रामीणों को बहलाया जा रहा है, जबकि असलियत यह है कि भारी मात्रा में मुरूम निकालकर बाहर सप्लाई किया जा रहा है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि मुरूम निकालने वाले लोगों द्वारा तरह-तरह के प्रलोभन दिए जाते हैं। कहा जाता है कि तालाब का गहरीकरण कर देंगे, सौंदर्यीकरण कर देंगे और गांव का विकास कर देंगे। लेकिन यह सब केवल दिखावा और बहाना बनाकर जमीन को खोखला किया जा रहा है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि बिना किसी वैध अनुमति और खनिज विभाग की स्वीकृति के इतने बड़े पैमाने पर मुरूम की खुदाई आखिर कैसे हो रही है ? दिन रात में मशीनें चल रही हैं, रास्ते में दौड़ रहे हैं, जिस प्रकार से राजस्व की छती की जा रही है ठेकेदार की निजी स्वार्थ के कारण बड़े परमाणुओं पर अवैध मुरुम खुदाई कर राजस्व की छती की जा रही है लेकिन जिम्मेदार विभागों को कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा। इससे साफ जाहिर होता है कि या तो प्रशासन पूरी तरह लापरवाह है या फिर इस अवैध कारोबार को मौन समर्थन मिल रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते इस अवैध खनन पर रोक नहीं लगाई गई तो गांव की जमीन बर्बाद हो जाएगी और पर्यावरण को भी गंभीर नुकसान होगा। तालाब के नाम पर जमीन को खोदकर मुरूम का अवैध व्यापार किया जा रहा है और प्रशासन की निष्क्रियता से मुरूम माफियाओं के हौसले लगातार बुलंद होते जा रहे हैं।
जिले में पहले भी अवैध खनन के मामले सामने आते रहे हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जाती है। यही कारण है कि मुरूम माफिया बेखौफ होकर दिन-रात खनन कर रहे हैं।
अब सवाल यह उठता है कि क्या जिला प्रशासन और खनिज विभाग इस अवैध खेल पर सख्त कार्रवाई करेगा, या फिर इसी तरह नियम-कायदों को ताक पर रखकर प्राकृतिक संसाधनों की खुली लूट जारी रहेगी। अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो यह मामला और भी गंभीर रूप ले सकता है और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े हो सकते हैं

















