जिला गरियाबंद ब्लॉक छुरा ग्राम पंचायत पाण्डुका मेडिकल स्टोर बना सकता है मौत का अड्डा पाण्डुका में झोलाछाप डॉक्टर चला रहा अवैध नर्सिंग होम मरीज भर्ती इंडियन पेट्रोल पंप के सामने स्थित KV लक्ष्मी मेडिकल स्टोर की आड़ में अवैध रूप से नर्सिंग होम संचालित किए जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोप है कि एक झोलाछाप डॉक्टर मेडिकल स्टोर के पीछे मिनी अस्पताल में बदलकर मरीजों को भर्ती कर रहा है और खुलेआम इलाज किया जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक ग्राम कुटेना से आए एक मरीज को भर्ती किया गया है। 17 फरवरी के दिन मेडिकल स्टोर के पीछे बेड लगाकर सलाईन चढ़ाई एवं इंजेक्शन लगाए जा रहे हैं और गंभीर उपचार किए जा रहे हैं जबकि यह स्थान केवल दवा विक्रय के लिए पंजीकृत बताया जा रहा है।

क्या प्रशासन की मिलीभगत
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इस तथाकथित डॉक्टर का नाम National Medical Commission या राज्य मेडिकल रजिस्टर में दर्ज है ?
क्या इस स्थान को Clinical Establishments (Registration and Regulation) Act, 2010 के तहत नर्सिंग होम संचालन की अनुमति ही नहीं है परंतु खुलेआम अवैध तरीके से रमाकांत सिन्हा
क्या मेडिकल लाइसेंस लेकर मरीज भर्ती और उपचार करना कानूनी है ?

यदि नहीं तो फिर यह सब किसके संरक्षण में चल रहा है ?
जान से खिलवाड़ का खेल
बिना पंजीयन इलाज और भर्ती करना कानूनी अपराध है।
Clinical Establishments (Registration and Regulation) Act, 2010 के स्पष्ट प्रावधानों के बावजूद यदि मेडिकल स्टोर के आड़ में अस्पताल चला रहा है तो यह सीधा कानून की धज्जियां उड़ाने जैसा है।
किसी अनहोनी की स्थिति में Indian Penal Code की गंभीर धाराएं भी लागू हो सकती हैं।
कार्रवाई कब?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। सवाल उठ रहा है क्या किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार किया जा रहा है?
यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो यह मामला बड़े जनआक्रोश का रूप ले सकता है।
ड्रग इंस्पेक्टर की चुप्पी पर सवाल मेडिकल स्टोर की आड़ में ‘नर्सिंग होम’ कार्रवाई क्यों नहीं ?
पांडुका इंडियन पेट्रोल पंप के सामने स्थित KV लक्ष्मी मेडिकल स्टोर को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। बताया जा रहा है कि मेडिकल स्टोर की आड़ में पीछे अवैध रूप से नर्सिंग होम संचालित किया जा रहा है, जहां मरीजों को भर्ती कर इलाज किया जा रहा है।
स्थानीय लोगों का सवाल सीधा है क्या ड्रग इंस्पेक्टर को इसकी जानकारी नहीं है, या फिर जानबूझकर अनदेखी की जा रही है?
क्या नियम सिर्फ कागजों में?
मेडिकल स्टोर का लाइसेंस केवल दवा विक्रय के लिए होता है। यदि उसी परिसर में भर्ती और उपचार किया जा रहा है, तो यह गंभीर उल्लंघन है।
Drugs and Cosmetics Act, 1940 के तहत लाइसेंस की शर्तों का उल्लंघन होने पर ड्रग इंस्पेक्टर को कार्रवाई का अधिकार है जिसमें लाइसेंस निलंबन या निरस्तीकरण तक शामिल है।
वहीं बिना पंजीयन क्लीनिक/नर्सिंग होम संचालन Clinical Establishments (Registration and Regulation) Act, 2010 के खिलाफ है।
जिम्मेदारी किसकी ?
क्या ड्रग विभाग ने स्थल निरीक्षण किया ? पंजीयन देते समय
मौखिक CMHO कार्यालय शिकायतें हुई कोई कार्रवाई नहीं ?
नियमों का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है और फिर भी विभाग मौन है, तो यह प्रशासनिक लापरवाही मानी जाएगी।
जनता का सवाल “बंद कब होगा अवैध खेल?”
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि मेडिकल स्टोर की आड़ में नर्सिंग होम चलाना सीधे तौर पर मरीजों की जान से खिलवाड़ है। यदि ड्रग इंस्पेक्टर और स्वास्थ्य विभाग समय रहते कार्रवाई नहीं करते, तो किसी भी अनहोनी की जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों पर तय होनी चाहिए।
अब देखना यह है कि प्रशासन जागता है या फिर यह अवैध खेल यूँ ही चलता रहेगा।

















