सरकारी कर्मचारी नेताओ को मिली पीएम आवास में लाभ
पीएम आवास योजना में बड़ा खेल : पत्नी हेडमास्टर, पति कांग्रेस नेता को मिला आवास? जिला प्रशासन की चुप्पी सवालों के घेरे में

छुरा । गरियाबंद जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) को लेकर लगातार बड़े घोटाले सामने आ रहे हैं। छुरा जनपद पंचायत क्षेत्र में जो खुलासा हुआ है, गरियाबंद जिले में राजनीति और प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया है। मामला ग्राम पंचायत सोरिदखुर्द का है, कांग्रेस नेता किराना व्यवसायी चित्रसेन डड़सेना उनकी पत्नी हिरा बाई डड़सेना, जो कि प्राथमिक विद्यालय सोरिदखुर्द में प्रधान पाठक (हेडमास्टर ) पद पर पदस्त एवं निवास हैं।

पंचायत सोरिदखुर्द में सरकारी सेवा में होने के बावजूद पीएम आवास योजना का लाभ उन्हें दिया गया और मकान भी बनकर तैयार हो गया। किस प्रकार सरकारी योजना का बंदरबाट किया जा रहा है। सरपंच, सचिव की मिलीभगत से गरीबों का हक पर डाका डाला जा रहा है। जिम्मेदार पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।

पत्नी सरकारी सेवा में हैं, फिर भी नाम जोड़ा गया– चित्रसेन को मिला आवास
चित्रसेन डड़सेना आवास का मामला मीडिया में आने पर भी कार्यवाही में सुस्त रवैया जनपद पंचायत छुरा धरोहर संदेश में 28 अगस्त समाचार प्रकाशन होने के बाद भी मौन चुप्पी धारण कर जिम्मेदारो को सहयोग किया जा रहा है। वर्ष 2024 में पीएम आवास स्वीकृत हुआ। परंतु पत्नी सरकारी सेवा में हैं। इसके बावजूद सूची में नाम जोड़ कर सरकार को गुमराह कर सरकारी योजना का लाभ लिया गया।

मीडिया में प्रकाशन के बाद बचाने की तैयारी –
आवास तैयार कर राशि का लाभ ले लिया, क्या लाभ लेना और खर्च कर देना या खाते में आना दोनों अंतर नहीं है।
सच को पहना रहे कपड़ा
सच की खुली पोल तो काग्रेस नेताजी कहा रहे है हम लाभ नहीं लेना चाहते थे अधिकारी ने बिना बोले दे दिए ? जब राशि स्वीकृती आदेश मिली तो भी सोए थे? नेता जी सोचे को किसी को नहीं पता चलेगा। जब आवास की राशि को निकल कर खर्च कर रहे थे तब याद नहीं आया कि पत्नी सरकारी स्कूल में प्रधान पाठक है । सवाल कई है गरीब परिवार वर्षों से आस में है कि कब मिलेंगे आवास लेकिन आज तक नहीं मिली रहा आवास?
यह कैसे हुआ? आखिर किसके दबाव में अधिकारी-कर्मचारी ने खेला किया?”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गरीबों को पक्का मकान 2026 देने का सपना दिखाया था, गरीबों के लिए नहीं अपने चाहितो को दिया गया। भ्रष्ट अफसरों, पंचायत सचिव, पंचायत प्रतिनिधियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से इस पीएम आवास योजना का मजाक बनाकर रख दिया गया है।
पीएम आवास योजना का लाभ लेने के समाचार
जनपद पंचायत सीईओ सतीश चन्द्रवंशी तक पहुंची, मगर उन्होंने भी गंभीरता एवं रिकवरी के नोट सीट नहीं चलाई एवं जिम्मेदार व्यक्तियों पर सस्पेंड रिकवरी की कार्यवाही नहीं की गई।
- सचिव पर fir होनी चाहिए सस्पेंड रिकवरी की कार्यवाही नहीं हुई
- घर मालिक जिन्होनें जन बुझ कर पीएम आवास का लाभ लिया अपनी पहचान छिपा कर योजना का लाभ लेने के लिए फर्जीवाड़ा, गुमराह किया गया FIR के साथ रिकवरी दोनों होनी चाहिए?
सैय्या भय कोतवाल तो काहे का डर
जनता में यह कहावत अब खुलेआम गूंज रही है कि जब “सैय्या ही कोतवाल बन बैठे तो डर किस बात का?”। यही वजह है कि पीएम आवास जैसी महत्वाकांक्षी योजना में करोड़ों की गड़बड़ी उजागर होने के बाद भी न किसी अधिकारी को निलंबित किया गया और न ही किसी जनप्रतिनिधि की जवाबदेही तय की गई।
भरुवामुडा, हिराबतर, रसेला और रुवाड के मामले
यह खेल सिर्फ सोरिद पंचायत तक सीमित नहीं है।

- भरुवामुडा (आश्रित ग्राम हिराबतर) : यहां के बैशाखू राम पिता फिरतू राम ने पीएम आवास की दस्तावेजों में गड़बड़ी कर दूसरे को दिया गयासरपंच द्वारा आवास के नाम पर 5000 लिया गया सवाल उठता है – गरीबों के लिए आई आवास पर गड़बड़ी करने वाले पूर्व सरपंच
सचिव पर कोई कार्रवाई नहीं - रुवाड पंचायत : यहां तो हद हो गई। बिना मकान बनाए ही पीएम आवास की पूरी राशि निकाल ली गई। यह काम भी अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत के बिना संभव नहीं था। सरपंच सचिव से साथ जिम्मेदार पर कोई कार्रवाई नहीं
- रसेला पंचायत: छुरा नगर निवासी बसंत सेन के नाम से ग्राम पंचायत रसेला में प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना स्वीकृत हुई और 95 हजार की राशि जारी, पर मकान निर्माण नहीं। हितग्राही ने राशि ग्राम समिति को दान करने की बात कबूल की। राशि सीधे दान कर दी। पर सरपंच सचिव हितग्राही पर कोई कार्रवाई नहीं?
इन घोटालों का पर्दाफाश ग्रामीणों और जागरूक लोगों ने किया, लेकिन प्रशासन की ओर से आज तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
प्रभारी सीईओ का घिसा-पिटा जवाब
जनपद पंचायत के प्रभारी सीईओ सतीश चन्द्रवंशी से जब भी सवाल पूछा जाता है, उनका जवाब हर बार एक ही होता है – जांच करवाएंगे, कार्रवाई करेंगे।
लेकिन कई महीने गुजर जाने के बाद भी जांच का कोई अता-पता नहीं है। न रिपोर्ट आई और न कार्रवाई हुई। नतीजा यह है कि ग्रामीणों का भरोसा प्रशासन से पूरी तरह उठता जा रहा है। सरकार केवल अधिकारों पर मेहरवान
गरीबों का हक मार रहे रसूखदार
ग्रामीणों का कहना है कि यह पूरा खेल सिर्फ भ्रष्टाचार नहीं बल्कि गरीबों के हक पर डाका है। जिन लोगों को आज भी टूटी झोपड़ियों और कच्चे घरों में रहना पड़ रहा है, वे आवास योजना की उम्मीद लगाए बैठे हैं। लेकिन सूची में नाम जोड़ दिए जा रहे हैं उन लोगों के, जो सरकारी कर्मचारी हैं, या फिर वे लोग जिनके पास पहले से पक्का मकान है।
बड़ा सवाल – जिम्मेदार कौन?
- जब जनपद पंचायत ने खुद मान लिया कि सरकारी सेवा में होने के बावजूद आवास दिया गया, तो जिम्मेदार कर्मचारियों पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
- बिना मकान बने राशि का आहरण कैसे हुआ? इसकी मंजूरी किसने दी?
- कलेक्टर और जिला सीईओ तमाम शिकायतों के बावजूद खामोश क्यों हैं?
- क्या प्रधानमंत्री की योजनाओं को पलीता लगाने वालों को राजनीतिक संरक्षण मिल रहा है?
- क्या जहां निवास वही प्रधान पाठक पद पर पदस्त हो सकता है?
- पत्नी सरकारी नौकरी तो पति को मिला लाभ सोची समझी रणनीति कूटरचित कर लिया गया लाभ पीएम आवास योजना
बाईट – पूर्व विधायक अमितेश शुक्ल जी ने कहा कि मेरे जानकारी में नहीं है अगर आवास योजना का लाभ गलत तरीके से लिया गया है जिम्मेदार वह खुद है पार्टी का नाम लेकर बदनाम करने की कोशिश कोई भी करेगा उस पर कार्यवाही किया जाएगा

















