गरियाबंद में एनडीपीएस, एससी-एसटी व विद्युत न्यायालय की स्थापना की मांग तेज, अधिवक्ता संघ ने मुख्य न्यायाधीश को भेजा ज्ञापन

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गरियाबंद। जिले में न्यायिक सुविधाओं के विस्तार की मांग को लेकर अधिवक्ता संघ गरियाबंद ने छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर के माननीय मुख्य न्यायाधीश को विस्तृत ज्ञापन भेजकर गरियाबंद में एनडीपीएस (नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस), एससी-एसटी (अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण) तथा विद्युत (इलेक्ट्रिसिटी) न्यायालय की स्थापना की मांग की है। अधिवक्ता संघ का कहना है कि इन विशेष न्यायालयों की स्थापना से जिले के हजारों लोगों को त्वरित, सस्ता और सुलभ न्याय मिल सकेगा।


गरियाबंद जिले में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय की स्थापना वर्ष 2011-12 में हुई थी। उसी समय प्रदेश के अन्य नए जिलों में भी अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय स्थापित किए गए थे। लेकिन उन जिलों में समय के साथ जिला न्यायालय एवं विशेष न्यायालयों की स्थापना हो चुकी है, जबकि गरियाबंद आज भी इन महत्वपूर्ण न्यायालयों की सुविधा से वंचित है।
अधिवक्ता संघ ने उल्लेख किया है कि भौगोलिक दृष्टि से गरियाबंद जिला काफी विस्तृत है। रायपुर से देवभोग की दूरी लगभग 220 किलोमीटर है तथा जिले की आबादी 5 लाख से अधिक है। जिले में 334 ग्राम पंचायतें और 710 राजस्व ग्राम शामिल हैं। ऐसे में दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों को न्यायिक कार्यों के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है, जिससे समय और धन दोनों की हानि होती है।


ज्ञापन में कहा गया है कि वर्तमान में एनडीपीएस, एससी-एसटी एवं विद्युत न्यायालयों से संबंधित मामलों की सुनवाई के लिए लोगों को रायपुर जाना पड़ता है। गरियाबंद मुख्यालय से रायपुर की दूरी लगभग 90 किलोमीटर तथा देवभोग क्षेत्र से लगभग 220 किलोमीटर होने के कारण गरीब, महिला, बुजुर्ग एवं ग्रामीण पक्षकारों को आर्थिक, मानसिक और शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कई मामलों में केवल तारीख पर उपस्थित होने के लिए पूरा दिन खर्च हो जाता है।
अधिवक्ता संघ ने यह भी कहा है कि गरियाबंद जिले की सीमा ओडिशा राज्य से लगी होने के कारण अवैध गांजा तस्करी से जुड़े एनडीपीएस अधिनियम के प्रकरण अपेक्षाकृत अधिक संख्या में दर्ज होते हैं। वहीं जिला अनुसूचित जाति एवं जनजाति बहुल क्षेत्र होने के कारण एससी-एसटी अत्याचार अधिनियम से जुड़े मामलों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। इन मामलों की सुनवाई रायपुर में होने से प्रकरणों के निराकरण में अनावश्यक विलंब होता है और पीड़ितों को न्याय मिलने में देरी होती है।
गरियाबंद में इन विशेष न्यायालयों की स्थापना के लिए आवश्यक आधारभूत ढांचा एवं अन्य संसाधन उपलब्ध हैं। यदि यहां एनडीपीएस, एससी-एसटी एवं विद्युत न्यायालय स्थापित किए जाते हैं तो न्याय व्यवस्था और अधिक प्रभावी होगी तथा आम नागरिकों को स्थानीय स्तर पर ही न्यायिक सुविधा उपलब्ध हो सकेगी।


अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष नरेंद्र देवांगन ने मुख्य न्यायाधीश से आग्रह किया है कि जनहित एवं न्याय की सुलभता को ध्यान में रखते हुए गरियाबंद में शीघ्र जिला न्यायालय का दर्जा प्रदान करने के साथ-साथ एनडीपीएस, एससी-एसटी तथा विद्युत न्यायालयों की स्थापना की स्वीकृति प्रदान की जाए। संघ ने विश्वास जताया है कि इससे न्यायिक प्रक्रिया में तेजी आएगी और जिले के लोगों को राहत मिलेगी।