श्रम विभाग में शिकायत तीन बेरोजगार युवकों के साथ ठगी नौकरी के नाम पर मौखिक तबादला के नाम पर छला गया
जिला गरियाबंद में नौकरी के नाम पर ठगी का बड़ा मामला उजागर
आदिम जाति विकास विभाग से जुड़े दलालों और अधिकारियों पर मिलीभगत के गंभीर आरोप
पीड़ित बेरोजगार युवाओं ने की उच्चस्तरीय जांच की मांग
गरियाबंद।

जिला गरियाबंद में आदिम जाति विकास विभाग से जुड़े छात्रावासों में नौकरी दिलाने के नाम पर बेरोजगार युवाओं से ठगी, शोषण और भ्रष्टाचार का एक गंभीर मामला सामने आया है। पीड़ित युवाओं ने श्रम विभाग, पुलिस एवं प्रशासन को शिकायत कर पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
मामले के अनुसार, जिले के आदिम जाति एवं आदिवासी छात्रावास गरियाबंद में मौखिक आदेश के आधार पर युवाओं को नौकरी पर रखा गया। न तो किसी प्रकार का लिखित नियुक्ति आदेश दिया गया और न ही श्रम कानूनों का पालन किया गया। काम कराने के बावजूद कई महीनों तक मजदूरी का भुगतान नहीं किया गया, जिससे पीड़ित युवाओं को आर्थिक और मानसिक रूप से भारी नुकसान उठाना पड़ा।
काम कराया गया, लेकिन मजदूरी नहीं मिली

पीड़ितों के अनुसार—
महावीर यादव से लगभग साढ़े तीन माह तक कार्य कराया गया
खोमेश साहू से डेढ़ माह
दिग्विजय सिंह से करीब दस माह तक लगातार काम लिया गया
इसके बावजूद, अधीक्षक नरेंद्र सोनवानी द्वारा बिना किसी कारण बताए सभी को मौखिक रूप से नौकरी से निकाल दिया गया और उनकी बकाया मजदूरी भी नहीं दी गई। बेरोजगारों से नरेंद्र सोनवानी के द्वारा ठगी भी किया गया कि अगर इस छात्रावास में रहना है तो 10000 रुपए दो इस प्रकार ₹10000 ₹20000 दो व्यक्ति से लिया गया
नौकरी के नाम पर लाखों की उगाही का आरोप
पीड़ितों का आरोप है कि गांव-गांव में घूमने वाले कथित विभागीय दलाल, आदिम जाति विकास विभाग का नाम लेकर गरीब और बेरोजगार युवाओं को नौकरी दिलाने का झांसा देते रहे। दलालों के पीछे विभाग के कुछ अधिकारी-कर्मचारियों का संरक्षण होने के कारण खुलेआम ठगी की जा रही है।
बताया जा रहा है कि नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों रुपये की अवैध वसूली की गई, जबकि जिन युवाओं से कम पैसे लिए गए, उन्हें या तो कम समय में निकाल दिया गया या फिर पूरा भुगतान ही नहीं किया गया।

धमकी देने का गंभीर आरोप
मामला तब और गंभीर हो गया जब पीड़ितों ने आरोप लगाया कि अधीक्षक नरेंद्र सोनवानी ने नौकरी से निकालने के बाद उनके घर जाकर धमकी दी। पीड़ितों के अनुसार कहा गया कि “अगर मेरा नाम कहीं आया तो जान से मार दूंगा।”
इस धमकी के बाद युवाओं में भय का माहौल बन गया, लेकिन अंततः तीनों पीड़ितों ने हिम्मत कर एफआईआर दर्ज करवाई, जिसके बाद पूरा मामला सामने आया।
एक पर कार्रवाई, तीनों दोषी बेदाग?
पीड़ितों का कहना है कि इस पूरे घोटाले में चार व्यक्ति सीधे तौर पर शामिल हैं, लेकिन कार्रवाई केवल एक व्यक्ति पर की गई, जबकि अन्य तीन को न केवल बचाया जा रहा है
बेरोजगार युवाओं के द्वारा सवाल
आदिमजाति विकास छात्रावास गरियाबंद में नौकरी भी दे दी गई। बाद में उन्हें भी बिना किसी कारण मौखिक रूप से हटा दिया गया।
यह स्थिति साफ तौर पर विभागीय मिलीभगत और जांच को प्रभावित करने की ओर इशारा करती है।
श्रम विभाग में भी शिकायत
काम का भुगतान न मिलने पर श्रम विभाग में भी शिकायत की गई, लेकिन अब तक पीड़ितों को न्याय नहीं मिला ल
इससे यह प्रतीत होता है कि प्रशासनिक स्तर पर भी मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया।
उच्चस्तरीय जांच की मांग
पीड़ित युवाओं और सामाजिक संगठनों ने न्याय की मांग
पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए
नौकरी के नाम पर की गई अवैध वसूली की रकम वापस दिलाई जाए
दोषी दलालों, अधिकारियों और कर्मचारियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई हो
मौखिक नियुक्ति और मौखिक बर्खास्तगी की परंपरा पर तत्काल रोक लगे
यह मामला न केवल बेरोजगार युवाओं के शोषण का उदाहरण है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि यदि समय रहते ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो गरीब और आदिवासी परिवारों के युवाओं के साथ इस तरह की ठगी आगे भी जारी रहेगी। एवं दोषी अधिकारियों के ऊपर भी ठोस कार्यवाही एवं टर्मिनेट होनी चाहिए क्योंकि इस प्रकार से गरियाबंद जिला में कार्य किए हैं वह दूसरे जिले में भी जाकर इस प्रकार से कार्य करेंगे बुलंद हौसले बरकरार रहेंगे ऐसे अधिकारियों पर लगाम नहीं लगने से कई बेरोजगार युवा एवं गरीब परिवार ठगते रहेंगे

















