वन विभाग द्वारा छापामार कार्यवाही की गई परंतु कुछ नहीं मिली दहशत डर में चेतन ठाकुर ने कीटनाशक दवाई 555 को खाया डर, खौफनाक इतनी की मरना सहज लगा ।

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जिला गरियाबंद के अंतर्गत ग्राम पंचायत कौनकेरा फॉरेस्ट विभाग के द्वारा कार्यवाही करने गए जहां सूचना तंत्र के द्वारा बताया गया की छालखापरी पैंगोलिन रखा गया है परंतु पैंगोलिन नहीं मिला । किंतु विभाग को कुछ ना कुछ कार्यवाही करनी थी। अपनी नाकामियों को साबित करनी थी। इसी वजह से पुरानी लकड़ी 12 नग बरामद किया गया। गांव में प्रत्येक घरो में अपनी जरूर के अनुसार लकड़ी रखते आवास के लिए ।

फारेस्ट विभाग द्वारा कहा गया वन अधिकार पट्टा को निरस्त कर दिया जाएगा जेल जाओगे इस प्रकार से डराया धमकाया गया। सुचना तंत्र ने बताया गया कि उसे टीम में चार महिला कर्मचारी थी। महिला कर्मचारी द्वारा इस प्रकार डराया गया की चेतन ठाकुर को सुसाइड करना बेहतर लगा। 555 कीटनाशक खाने को हो गए विवश अब जिंदगी मौत के बीच जूझ रहे हैं गरियाबंद जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां पर स्थिति गंभीर होती गई तभी रेफर किया गया एम्स में भर्ती कराया गया अभी भी हालत गंभीर है।
जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे चेतन ठाकुर के जिम्मेदार कौन जिस प्रकार से एक बार और भी हो चुका था एक आदिवासी परिवार के मुखिया की मौत जिसमें देवेंद्र तिवारी पर लगाया गया इल्जाम परंतु केवल सस्पेंड कर बहस कर दिया गया । जिम्मेदार कर्मचारियों पर किसी प्रकार से कार्यवाही नहीं की गई इस प्रकार से वन विभाग की चलती दादागिरी के कारण आज एक व्यक्ति जीवन और मृत्यु से जूझ रहे हैं।