गरियाबंद । जिला मुख्यालय से लगे ग्राम पंचायत डोंगरी गांव के आश्रित ग्राम केशोडार के दर्रापारा क्षेत्र में वन विभाग के तार घेरा से सटे शासकीय भूमि पर धड़ल्ले से अतिक्रमण कर अवैध निर्माण कार्य किया जा रहा है। यह कार्य प्रशासनिक अनदेखी और राजस्व विभाग की निष्क्रियता का प्रत्यक्ष प्रमाण बनता जा रहा है।

मिली जानकारी के अनुसार, दर्रापारा के कुछ स्थानीय निवासियों द्वारा आपसी लेनदेन के तहत शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा कर निर्माण कार्य किया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि कुछ वर्ष पूर्व इस क्षेत्र में शासकीय भूमि की अवैध खरीदी-बिक्री से संबंधित एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें खुलेआम जमीन का सौदा होते दिखाया गया था।

राजस्व विभाग की चुप्पी बनी दलालों का संबल
राजस्व विभाग की लापरवाही और कार्यवाही के अभाव ने अवैध गतिविधियों को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाई है। अब तो स्थिति यह है कि शासकीय भूमि के दलाल खुलेआम लोगों को जमीन बेचने का साहस कर रहे हैं और निर्माण कार्य भी बिना रोकटोक के जारी है। इससे साफ जाहिर होता है कि कहीं न कहीं प्रशासनिक मशीनरी की चुप्पी ने अतिक्रमणकारियों का मनोबल बढ़ा दिया है।

दर्रापारा क्षेत्र वन विभाग के तारघेरा से लगा हुआ है, ऐसे में शासकीय भूमि पर हो रहे निर्माण से न केवल पर्यावरणीय असंतुलन की आशंका है, बल्कि यह वन अधिनियम का भी स्पष्ट उल्लंघन है। सवाल यह भी उठता है कि क्या वन विभाग और राजस्व विभाग के अधिकारियों को इस गतिविधि की जानकारी नहीं है, या फिर जानबूझकर नजरें मूंदी जा रही हैं?

स्थानीय जागरूक नागरिकों ने इस पूरे प्रकरण पर नाराजगी जताई है और उच्च अधिकारियों से जांच कर कठोर कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि अगर समय रहते कार्रवाई नहीं की गई, तो यह अवैध कब्जा एक बड़े घोटाले का रूप ले सकता है।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या जिला प्रशासन और राजस्व विभाग इस गंभीर मुद्दे को संज्ञान में लेकर ठोस कदम उठाएंगे या फिर शासकीय भूमि पर कब्जा करने वालों को यूं ही खुली छूट मिलती रहेगी।


















