वॉशिंगटन, एजेंसी। वायुमंडल में सूर्य की पराबैंगनी किरणों को अवशोषित कर हमारी धरती को बचाने वाली ओजोन गैस जमीनी स्तर पर इंसानों के लिए घातक बन सकती है। एक नए अध्ययन में पाया गया है कि ओजोन प्रदूषण वाली आबोहवा में रोजाना रहने से असमय मौत का खतरा बढ़ सकता है।
यह निष्कर्ष 20 देशों के 400 से ज्यादा शहरों में किए गए अध्ययन के आधार पर निकाला गया है। इसमें पाया गया कि विभिन्न देश अगर वायु गुणवत्ता के मानकों को सख्ती से लागू करें तो छह हजार से ज्यादा लोगों को असमय मौत के मुंह में जाने से बचाया जा सकता है। ब्रिटेन के लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसिन के शोधकर्ताओं ने शहरी और उपनगरीय इलाकों में जमीनी स्तर पर उच्च प्रतिक्रिया वाली ओजोन को पाया। ओजोन ऑक्सीजन के तीन अणुओं से मिलकर बनी गैस है। सांस के जरिये शरीर में पहुंचने पर यह फेफड़ों को नुकसान पहुंचा सकती है।
टेस्टोस्टेरोन के उच्च स्तर से महिलाओं में डायबिटीज का खतरा
शोधकर्ताओं का कहना है कि जिन महिलाओं में आनुवांशिक तौर पर टेस्टोस्टेरोन हार्मोन का उच्च स्तर होता है, उनमें टाइप-2 डायबिटीज जैसे मेटाबोलिक रोग का खतरा बढ़ सकता है।
नेचर मेडिसिन जर्नल में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, टेस्टोस्टेरोन के उच्च स्तर के कारण महिलाओं में स्तन कैंसर का भी खतरा बढ़ सकता है। जबकि पुरुषों में इस हार्मोन के उच्च स्तर के चलते प्रोस्टेट कैंसर हो सकता है। यह निष्कर्ष कई अध्ययनों के विश्लेषण के आधार पर निकाला गया है। आनुवांशिक तौर पर उच्च टेस्टोस्टेरोन वाली महिलाओं में टाइप-2 डायबिटीज का खतरा 37 फीसद ज्यादा पाया गया। जबकि पुरुषों में इस हार्मोन के उच्च स्तर के चलते टाइप-2 डायबिटीज का खतरा 14 फीसद कम पाया गया। ब्रिटेन की एक्सेटर यूनिवर्सिटी की शोधकर्ता कैथरीन रुथ ने कहा, ‘हमारे नतीजों से जाहिर होता है कि बीमारी पर टेस्टोस्टेरोन के प्रभाव की गहराई से पड़ताल की गई है

















