इन उपायो को अपनाकर , बचा जा सकता है खसरे से

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खसरे का इलाज दवाओं द्वारा तो किया ही जाता है, साथ ही इसमें खानपान की भी अहम भूमिका होती है। यह एक वायरस जनित रोग है, जो 2 से 3 हफ्तों में ठीक होने लगता है, लेकिन खानपान में कुछ बातों का परहेज रखकर संक्रमण की तकलीफ को कम किया जा सकता है। तेज बुखार होने पर डॉक्टरी सलाह पर पैरासिटामॉल ली जा सकती है। दानों में खुजली और जलन होने पर डॉक्टरी सलाह पर कैलेमाइन लोशन लगाया जा सकता है। गले में खराश और दर्द होने पर गुनगुने पानी से गरारे करने पर आराम मिलता है। लगातार थोड़ी-थोड़ी देर में गुनगुना पानी पीने से भी राहत मिलती है। खसरे से ग्रस्त मरीज को खुले और हवादार कमरे में रखना चाहिए। मरीज व आसपास के लोगों को साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखना चाहिए। गर्भवती महिलाओं शिशुओं और कम इम्युनिटी वाले लोगों को खसरे की चपेट में आने के बाद छह दिनों के भीतर प्रोटीन एंटी-बॉडी इंजेक्शन दिया जाता है जो खसरे के प्रकोप को थोड़ा कम कर देता है। हालांकि खसरे के प्रारंभिक लक्षणों के आधार पर इसकी मौजूदगी की पुष्टि की जाती हैए लेकिन कभी-कभी डॉक्टर खून की जांच करके भी पता लगाते हैं कि शरीर पर उभरे दाने कहीं किसी अन्य बीमारी के लक्षण तो नहीं हैं। अकसर लोग इसे दैवीय प्रकोप भी मान लेते हैं और उपचार के रूप में बहुत से अनुष्ठान व झाड़-फूंक आदि के उपाय करते हैं, जबकि यह पूरी तरह से एक विषाणु जनित रोग है।